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New Delhi : जूनियर वकीलों के हक में ‘सुप्रीम’ फैसला

New Delhi: 'Supreme' Verdict in Favor of Junior Lawyers

नई दिल्ली : (New Delhi) देश की सबसे बड़ी अदालत ने जूनियर वकीलों के हक में एक बेहद मानवीय फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि आर्थिक तंगी की वजह से कई होनहार और युवा वकील वकालत छोड़ रहे हैं। इस ‘ब्रेन ड्रेन’ को (‘brain drain’) रोकना बहुत जरूरी है। इसके लिए ‘यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड’ (‘Young Lawyers Professional Assistance Fund’) बनाया जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना (Justice Surya Kant and Justice V. Mohanan) की बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह आदेश महिला वकीलों के एक समूह की ओर से दायर याचिका पर आया है। याचिका में युवा वकीलों के शुरुआती संघर्ष, पैसों की किल्लत और महिला अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित माहौल का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि आर्थिक संकट किसी एक जेंडर का नहीं है। पहली पीढ़ी के वकीलों को शुरुआत में न तो कोई ऑफिस मिलता है, न लाइब्रेरी और न ही मुवक्किल। वे सीनियर्स या स्थानीय बार एसोसिएशनों से मिलने वाले बेहद कम वजीफे पर निर्भर रहते हैं। यह राशि बुनियादी खर्चों के लिए भी पूरी नहीं पड़ती।

महिला वकीलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
शीर्ष अदालत ने महिला वकीलों की दिक्कतों को बहुत गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि महिला वकीलों को दिन का एक बड़ा हिस्सा कोर्ट परिसर में ही बिताना पड़ता है। इसलिए उनके आराम, गोपनीयता, सुरक्षा और काम के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाना बेहद जरूरी है। इसके बिना इस पेशे में महिलाओं की लंबी और मजबूत भागीदारी मुमकिन नहीं है।

सीनियर वकीलों के दान से बनेगा मजबूत फंड
सुप्रीम कोर्ट ने इस फंड को चलाने का एक पूरा प्लान सामने रखा है। यह फंड सीधे हाई कोर्ट या केंद्र सरकार द्वारा गठित किसी स्वायत्त संस्था के नियंत्रण में होना चाहिए। कोर्ट का सुझाव है कि इसके लिए एक कानून बने। देश के सफल और सीनियर वकील इस फंड में अपनी तरफ से नियमित दान दें। दान देने वाले वकीलों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट, नेशनल अवार्ड या अन्य सम्मान दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारें कोर्ट फीस का एक हिस्सा इस फंड में जमा कराएं। कोर्ट में लगने वाले जुर्माने की राशि को भी इसी फंड में डाला जा सकता है।

सात साल तक मिलेगी वजीफे की मदद
इस योजना के तहत जरूरतमंद और पहली पीढ़ी के युवा वकीलों को हर महीने वजीफा दिया जाएगा। शुरुआती तीन साल तक यह राशि इतनी होगी कि वे अपनी आजीविका चला सकें। इसके बाद अगले चार वर्षों में इस राशि को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। वकालत के सात साल पूरे होने पर यह मदद पूरी तरह बंद हो जाएगी। वजीफा पाने वाले युवाओं को सीनियर वकीलों के साथ जुड़कर काम करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने ‘पे-इट-बैक’ (‘pay-it-back’) मॉडल की बात भी कही। यानी जब ये वकील खुद स्थापित हो जाएं, तो वे किश्तों में इस पैसे को फंड में वापस लौटाएं। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आत्मनिर्भर कोष बना रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और राज्यों के एडवोकेट जनरल को भी मदद के लिए मौजूद रहने को कहा है।