
अब बिना लक्षण वाले लोगों की भी होगी टीबी जांच
सीवान : (Siwan) देश से क्षय रोग के उन्मूलन की दिशा में सीवान सदर अस्पताल ने नई पहल शुरू की है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग (Central TB Division of the Union Ministry of Health and Family Welfare) के निर्देश पर गुरुवार को सदर अस्पताल के आरटी-पीसीआर लैब में ओपन आरटी-पीसीआर परियोजना का शुभारंभ किया गया।
सात सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने लैब कर्मियों को क्वांटिप्लस एमटीबी फास्ट डिटेक्शन किट (Quantiplus MTB Fast Detection Kit) से टीबी जांच का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के बाद बलगम के नमूनों की ट्रायल जांच कर परियोजना की शुरुआत की गई।
परियोजना के तहत अब ऐसे लोगों की भी टीबी जांच की जाएगी, जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं हैं। इनके स्पुटम का मॉलिक्यूलर परीक्षण कर शुरुआती चरण में ही संक्रमण की पहचान की जाएगी, ताकि समय पर इलाज शुरू कर संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके।
केंद्रीय टीबी प्रभाग के प्रोग्राम मैनेजर वरुण श्रीवास्तव (Varun Srivastava, Program Manager of the Central TB Division) ने बताया कि इस परियोजना के तहत असिम्प्टोमैटिक लेकिन टीबी के प्रति अधिक संवेदनशील लोगों के नमूने लिए जाएंगे। इनमें मधुमेह, किडनी रोग, एचआईवी, उच्च रक्तचाप तथा अन्य गंभीर सह-रोगों से पीड़ित व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के तुरंत बाद जांच शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि यह परिचालन व्यवहार्यता अध्ययन केंद्रीय टीबी प्रभाग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसमें स्वदेशी क्वांटिप्लस एमटीबी फास्ट डिटेक्शन किट, जिसे आईसीएमआर एवं सीडीएससीओ से मंजूरी प्राप्त है, के माध्यम से थूक के नमूनों में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस कॉम्प्लेक्स (Mycobacterium tuberculosis complex) की पहचान की जाएगी।
विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन (William J. Clinton Foundation) के सहयोग से संचालित इस पायलट परियोजना के लिए बिहार में केवल दो प्रयोगशालाओं पटना और सीवान का चयन किया गया है।परियोजना के तहत सदर अस्पताल में ओपीडी मरीजों तथा सक्रिय टीबी खोज अभियान के दौरान एकत्रित स्पुटम नमूनों की जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना में उपयोग होने वाली आरटी-पीसीआर किट एवं अन्य उपभोग्य सामग्रियों का पूरा खर्च गेट्स फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से वहन किया जाएगा। इससे सदर अस्पताल अथवा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
परियोजना के संचालन के लिए आरटी पीसीआर के माइक्रो बायोलॉजिस्ट तौसीफ रजा,सीनियर लैब टेक्नीशियन प्रदीप कुमार के अतिरिक्त लैब टेक्नीशियन मो. मोदस्सर हुसैन और शंभूनाथ सिंह की तैनाती की गई है। वहीं गौतम कुमार को राज्य स्तरीय समन्वयक एवं प्रमुख संपर्क अधिकारी बनाया गया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डब्ल्यूजेसीएफ के डॉ. आनंद, फैजुल हसन एवं नदीम हसन ने लैब कर्मियों को नई जांच प्रणाली की तकनीकी जानकारी दी। वहीं जिला टीबी कार्यक्रम के डिस्ट्रिक्ट सुपरवाइजर पंकज कुमार सिंह परियोजना के सफल क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना टीबी की त्वरित और सटीक पहचान में मील का पत्थर साबित होगी तथा भविष्य में देशभर में ओपन आरटी-पीसीआर तकनीक के विस्तार का आधार बनेगी।
सीडीओ डॉ. अशोक कुमार (CMO Dr. Ashok Kumar) ने कहा, “ओपन आरटी-पीसीआर परियोजना से टीबी की जल्द पहचान संभव होगी। बिना लक्षण वाले जोखिमग्रस्त लोगों की जांच से समय पर उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूती मिलेगी।”
