
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar, the National President of the Nationalist Congress Party) के सामने नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह (Party National Secretary Sachchidanand Singh) ने उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की वैधता पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। 9 जुलाई 2026 को जारी इस नोटिस में 26 फरवरी 2026 को हुई राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया को पार्टी संविधान के विपरीत बताते हुए उसे निरस्त कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की वैधता पर उठे सवाल
कानूनी नोटिस में सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया है कि 26 फरवरी 2026 को संपन्न राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव पार्टी के संविधान और निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की वैधता संदिग्ध हो गई है। उन्होंने मांग की है कि इस चुनाव को तत्काल प्रभाव से रद्द कर स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से दोबारा चुनाव कराया जाए।
तीन शीर्ष नेताओं को बनाया पक्षकार
इस विवाद में केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल तथा राष्ट्रीय सचिव ब्रजमोहन श्रीवास्तव (National President Sunetra Pawar, Working President Praful Patel and National Secretary Brajmohan Srivastava) को पक्षकार बनाया गया है। नोटिस में कहा गया है कि नई चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष और संशोधित पदाधिकारियों की सूची को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
स्वतंत्र चुनाव अधिकारी की निगरानी में मतदान की मांग
सच्चिदानंद सिंह ने अपने नोटिस में यह भी मांग की है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष बाहरी चुनाव अधिकारी की निगरानी में कराया जाए। उनका तर्क है कि इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए निष्पक्ष चुनाव आवश्यक है।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली बड़ी चुनौती
राकांपा (अजित) के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के बाद यह पहला बड़ा आंतरिक विवाद माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व में परिवर्तन के बाद सुनेत्रा पवार ने संगठन की कमान संभाली थी और बाद में उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही उन्हें महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। अब उनके अध्यक्ष पद को लेकर उठे सवालों ने संगठन के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।
पार्टी की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
कानूनी नोटिस सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुनेत्रा पवार और पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का जवाब किस प्रकार देते हैं। यदि इस मामले पर संगठन के भीतर सहमति नहीं बनती, तो विवाद कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर और गहरा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में राकांपा (अजित) की आंतरिक राजनीति और संगठनात्मक संरचना पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
