
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले कुछ दिनों से धीमा पड़ा मानसून अब फिर सक्रिय होने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) (India Meteorological Department) के अनुसार गुरुवार से राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी, जबकि 20 जुलाई के बाद पूरे महाराष्ट्र में मानसून पूरी तरह सक्रिय होकर भारी बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है। इससे उमस से परेशान लोगों और खरीफ फसलों के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुंबई, ठाणे समेत कोंकण में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग (Meteorological Department) ने मुंबई, पालघर, ठाणे, रायगड, रत्नागिरि और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए येलो अलर्ट (‘Yellow Alert’) जारी किया है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक और भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अरब सागर (Arabian Sea) में बदलती हवाओं के कारण मानसून की गति प्रभावित हुई थी, लेकिन अब अनुकूल परिस्थितियां बनने से बारिश दोबारा सक्रिय हो रही है।
पश्चिम महाराष्ट्र में 17 जुलाई से बढ़ेगा बारिश का जोर
पुणे, सातारा, कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर (Pune, Satara, Kolhapur, Sangli, and Solapur) में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। वहीं पुणे, सातारा और कोल्हापुर के घाट क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 17 जुलाई के बाद पश्चिम महाराष्ट्र में वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना जताई है।
उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ में भी बदलेगा मौसम
नंदुरबार, धुलिया, जलगांव और नासिक में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश का अनुमान है, जबकि अहिल्यानगर में हल्की वर्षा हो सकती है। मराठवाड़ा के बीड, परभणी, नांदेड़ और हिंगोली में भी बारिश की संभावना है। छत्रपति संभाजीनगर और जालना में 16 जुलाई से वर्षा तेज होने के संकेत हैं। वहीं विदर्भ में नागपुर सहित कई क्षेत्रों में मौसम बदलने लगा है और 16 जुलाई से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
खरीफ फसलों के लिए राहत की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार 20 जुलाई के बाद राज्यभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है। इससे बांधों में जलस्तर बढ़ेगा और बारिश के इंतजार में खड़ी खरीफ फसलें, विशेषकर सोयाबीन और कपास, लाभान्वित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी बारिश होने पर किसानों को दोबारा बुवाई की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा और कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी।
