
नई दिल्ली/मुंबई : (New Delhi/Mumbai) महाराष्ट्र के बहुचर्चित लवासा हिल स्टेशन परियोजना (high-profile Lavasa Hill Station project case in Maharashtra) मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले (Sharad Pawar, MP Supriya Sule) और अन्य संबंधित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने परियोजना में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस प्रकरण में आगे कोई दखल नहीं देगी।
क्या था मामला?
नाशिक के पत्रकार एवं अधिवक्ता नानासाहेब जाधव (Nanasaheb Jadhav, a journalist and lawyer from Nashik) ने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लवासा परियोजना के विकास के दौरान तत्कालीन सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग कर कंपनी को लाभ पहुंचाया। याचिकाकर्ता का दावा था कि परियोजना के लिए सरकारी जमीन रियायती दरों पर उपलब्ध कराई गई, आवश्यक मंजूरियों से पहले बड़े पैमाने पर भूमि खरीदी गई और इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इन आरोपों के आधार पर सीबीआई जांच और आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
इससे पहले फरवरी 2022 में मुंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने भी जनहित याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका काफी देरी से दायर की गई और परियोजना का बड़ा हिस्सा विकसित हो जाने के बाद हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। राज्य सरकार ने भी अदालत में कहा था कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परियोजना विकसित की गई तथा सभी मंजूरियां कानूनी प्रक्रिया के तहत दी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी है।
फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के नेताओं ने इसका स्वागत किया। पार्टी की ओर से कहा गया कि मामले में कोई ठोस आधार नहीं था और न्यायपालिका ने तथ्यों के आधार पर निर्णय दिया है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक आरोपों पर न्यायिक विराम बताया।
वर्षों से विवादों में रहा लवासा प्रोजेक्ट
पुणे जिले में विकसित लवासा परियोजना (Lavasa project, developed in Pune district) लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों का केंद्र रही है। पर्यावरणीय मंजूरियों, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर समय-समय पर विभिन्न मंचों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग को बड़ा झटका लगा है। इस निर्णय के साथ लवासा परियोजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है।
