
जयपुर : (Jaipur) राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसव (childbirth in government hospitals) के बाद लगातार हो रही प्रसूताओं की मौत ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ महीनों में कोटा, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों (Kota, Bikaner, Jodhpur, Bhilwara, and Banswara) में सामने आए मामलों में अब तक 23 महिलाओं की जान जा चुकी है। हर घटना के बाद जांच समितियां गठित की गईं, अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन किसी भी मामले की अंतिम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
कोटा में सबसे गंभीर मामला, 5 महिलाओं की मौत
कोटा के जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में (Kota’s JK Lon Hospital and New Medical College Hospital) सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। यहां 12 प्रसूताओं की हालत खराब हुई, जिनमें चार प्रसूताओं और एक गर्भवती महिला समेत पांच महिलाओं की मौत हो गई।मामले की जांच के बाद कई डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया, कुछ पर बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई और अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी किए गए। चिकित्सा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अस्पताल का दौरा किया, लेकिन अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
बीकानेर में किडनी फेलियर से मौतों ने बढ़ाई चिंता
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital in Bikaner) में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आया। गंभीर हालत में सभी महिलाओं को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और डायलिसिस तक की जरूरत पड़ी। इलाज के दौरान तीन महिलाओं की मौत हो गई।चिकित्सा विभाग ने संक्रमण समेत अन्य संभावित कारणों की जांच शुरू की, लेकिन अब तक स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है।जोधपुर के भोपालगढ़ उपजिला अस्पताल में पांच दिनों के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हुई। दोनों महिलाओं को गंभीर स्थिति में उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। मामले के बाद एक महिला चिकित्सक और एक नर्सिंग अधिकारी को एपीओ किया गया तथा विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जा रही है।
भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में भी हालात गंभीर
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल (Mahatma Gandhi Hospital in Bhilwara) में छह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया। विभाग ने ऑपरेशन थिएटर, दवाइयों, उपकरणों और संक्रमण की आशंका की जांच शुरू की है।वहीं, बांसवाड़ा में चार दिनों के भीतर चार प्रसूताओं की मौत के बाद जिला प्रशासन ने पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की समिति गठित की और जयपुर से विशेषज्ञ टीम भी भेजी गई।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर भी उठे सवाल
कोटा मामले की जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल अमानक पाया गया। लैब जांच में सामने आया कि इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन तत्व मौजूद नहीं था। इसके बाद संबंधित बैच की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाई गई तथा निर्माता कंपनी का लाइसेंस निलंबित किया गया।हालांकि सरकार का कहना है कि सभी मौतों को केवल इस इंजेक्शन से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग-अलग थीं।
स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर विपक्ष ने उठाए सवाल
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर (Health Minister Gajendra Singh Khinvsar) ने कहा है कि मौतों के कारणों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। उन्होंने दावा किया कि कई मामले हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी से जुड़े थे और राज्य में संस्थागत प्रसव का स्तर बढ़कर 94.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है।मंत्री ने यह भी कहा कि अब तक किसी चिकित्सकीय लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन जांच में यदि प्रोटोकॉल उल्लंघन सामने आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगातार हो रही मौतों पर सवाल पूछे जाने पर मंत्री की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इसे संवेदनहीनता बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Leader of the Opposition Tikaram Jully) ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार मौतों के बावजूद सरकार कारण स्पष्ट नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को टालने की कोशिश की जा रही है।राजस्थान के अलग-अलग जिलों में सामने आए इन मामलों में संक्रमण, किडनी फेलियर, अत्यधिक रक्तस्राव, हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर एनीमिया जैसी जटिलताएं सामने आई हैं। लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने के कारण मौतों के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।अब नजर इस बात पर है कि सरकार की जांच कब पूरी होगी, रिपोर्ट कब सामने आएगी और आखिर इन लगातार हो रही मौतों के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
