
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने जंतर-मंतर पर करीब बीस दिनों तक अनशन पर बैठने वाले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो (Gitanjali Angmo, the wife of Sonam Wangchuk) की याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। आज, रविवार को जस्टिस मिनी पुष्करणा (Justice Mini Pushkarna) की स्पेशल बेंच ने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान गीतांजलि की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Senior Advocate Kapil Sibal) ने कहा कि सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल और डॉक्टर के पास इलाज कराने का अधिकार है। तब कोर्ट ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों पर संदेह क्यों कर रहे हैं। इस पर सिब्बल ने कहा कि मैं सरकारी डॉक्टर पर संदेह नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ ये चाहता हूं कि सोनम वांगचुक और उनके परिवार को उनके पसंद के अस्पताल और डॉक्टर के पास भेजा जाए। सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की निगरानी के लिए पुलिस तैनात है। उनकी पत्नी और परिवार को मिलने तक नहीं दिया जा रहा है और इंतजार कराया जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा (Additional Solicitor General (ASG) Chetan Sharma) ने कहा कि सरकार किसी की जान बचाने के कर्तव्य से बंधी हुई है। सोनम वांगचुक को कुछ होता है तो इसके परिणाम होंगे। शर्मा ने कहा कि एम्स और सफदरजंग में राष्ट्रपति और दूसरी बड़ी हस्तियां इलाज के लिए आती हैं। सुनवाई के दौरान मौके पर मौजूद एम्स के एक डॉक्टर ने कहा कि उन्हें हमारे ऊपर विश्वास नहीं है। केवल भरोसे का सवाल है। तब सिब्बल ने कहा कि वहां पुलिस वाला क्या कर रहा था, उसका बीपी बढ़ा हुआ था। क्या वो मरीज का इलाज कर रहा था। तब चेतन शर्मा ने कहा कि ये गलत है, कोई पुलिसकर्मी नहीं था।
सुनवाई के दौरान गीतांजलि ने कहा कि हम पोटैसियम को लेकर दूसरी राय चाहते थे लेकिन इसके लिए हमें मना किया गया। उसके बाद उन्होंने सैंपल के लिए कहा तो वो 12 घंटे बाद दिया गया। जब हम लैब में गए तो सभी बंद हो चुके थे। तब चेतन शर्मा ने कहा कि ये कोर्ट है एक्टिविज्म की जगह नहीं है।
गीतांजलि ने याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल से वांगचुक को तुरंत रिहा करने या किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि वांगचुक को उनके परिवार, वकीलों और उनके निजी डॉक्टरों से अलग रखकर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।
याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस ने उठा लिया और बिना उनकी सहमति के उन्हें सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) ले जाया गया। याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक के खिलाफ बिना किसी आपराधिक केस दर्ज किए या किसी कोर्ट से गिरफ्तारी या निरोधात्मक कार्रवाई करने के आदेश के अस्पताल में लगातार रखना गैरकानूनी है। उन्हें चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आड़ में हिरासत में रखा गया है। ऐसा केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हटाने के लिए किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में दिल्ली पुलिस ने ऐसा किया है, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए रखने का आदेश दिया था। अंजलि की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय में जो याचिका दायर की गई है उसमें न तो सोनम वांगचुक को पक्षकार बनाया गया है और न ही अंजलि को पक्षकार बनाया गया है। ऐसे में बिना सोनम वांगचुक की सहमति के उन्हें लगातार अस्पताल में हिरासत में कैसे रखा जा सकता है।
सोनम वांगचुक 28 जून से लगातार अनशन पर थे। ये अनशन नीट पेपर समेत दूसरी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक होने की घटनाओं के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए किया जा रहा है। सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाने के बाद भी वहां धरना जारी है। अब वहां छात्र संगठनों के नेताओं ने अनशन शुरु कर दिया है, जिनमें जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष शामिल हैं।
