
नई दिल्ली : (New Delhi) पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2024 (Public Examination (Prevention of Unfair Means) Act, implemented by the Central Government in 2024) में लागू किया गया पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। कानून लागू होने के बाद भी कई प्रमुख परीक्षाएं पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुईं। अब मोदी कैबिनेट ने इस कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसे सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा।
क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?
सरकार ने 2024 में यह कानून सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों को रोकने के लिए लागू किया था। यह कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA (UPSC, SSC, RRB, IBPS, and NTA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की परीक्षाओं पर लागू होता है।
हालांकि, कानून के बावजूद कई परीक्षाओं को पेपर लीक के कारण रद्द करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी प्रमुख वजहें थीं।सामान्य मामलों में केवल 3 से 5 वर्ष की सजा का प्रावधान। संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए अधिकतम 10 वर्ष की सजा। आरोपियों को अपेक्षाकृत आसानी से जमानत मिल जाना।
राज्य बोर्ड और विश्वविद्यालयों की अधिकांश परीक्षाएं कानून के दायरे से बाहर होना।इन कमियों के चलते परीक्षा माफियाओं पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा और छात्रों का विरोध बढ़ता गया।
नए संशोधन में क्या बदलेगा?
कैबिनेट से मंजूर संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माने को काफी बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।
जुर्माना: 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक। जेल की सजा: 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष तक।
फास्ट ट्रैक कोर्ट: पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें अनिवार्य होंगी।
समयबद्ध फैसला: अदालतों को तीन महीने के भीतर निर्णय देने का लक्ष्य दिया जाएगा।
संगठित गिरोहों पर सख्ती: पेपर लीक रैकेट, एजेंसियों और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान।
पुराने कानून में क्या था प्रावधान?
मौजूदा कानून के तहत
व्यक्तिगत मामलों में 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना। परीक्षा एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका साबित होने पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना और चार साल तक प्रतिबंध। संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 साल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माना।
दोषी संस्थाओं की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान।सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून मुख्य रूप से पेपर लीक माफिया, संगठित गिरोहों, एजेंसियों और परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने वाले लोगों पर कार्रवाई (paper-leak mafias, organized gangs, agencies, and individuals who interfere with the examination process) के लिए है। अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई संबंधित परीक्षा संस्थाओं के नियमों के अनुसार ही होगी।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
छात्र संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त कानून, त्वरित सुनवाई और भारी आर्थिक दंड से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अब संसद में विधेयक पेश होने के बाद इस पर आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू होगी।
