
कशेळी-मुलुंड जल सुरंग परियोजना की समीक्षा
मुंबई : (Mumbai) मुंबई की भविष्य की जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से निर्माणाधीन कशेळी (भिवंडी)-मुलुंड जकात नाका (Kasheli (Bhiwandi)-Mulund Octroi Naka water tunnel project) जल सुरंग परियोजना के कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) (बीएमसी) के अतिरिक्त आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर (Abhijit Bangar, Additional Commissioner) ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने को कहा।
7.13 किलोमीटर लंबी जल सुरंग का निर्माण जारी
बीएमसी द्वारा जल वितरण प्रणाली में रिसाव कम करने और जलापूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कशेळी महासंतुलन जलाशय से मुलुंड जकात नाका (Kasheli Master Balancing Reservoir to Mulund Octroi Naka) तक नई जल सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। सितंबर 2024 में शुरू हुई इस परियोजना के अक्टूबर 2030 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। परियोजना के तहत 7.13 किलोमीटर लंबी और 4.5 मीटर व्यास वाली सुरंग तैयार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बाथिमेट्रिक, भू-तकनीकी और स्थलाकृतिक सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। मुलुंड जकात नाका पर 134 मीटर गहरे लॉन्चिंग शाफ्ट का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। सुरंग से जुड़े कई प्रारंभिक निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
सितंबर 2026 से शुरू होगी टीबीएम से खुदाई
अभिजीत बांगर ने बताया कि सुरंग निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली 5.3 मीटर व्यास की टनल बोरिंग मशीन (Tunnel Boring Machine) (टीबीएम) तथा 14 किलोमीटर लंबी कन्वेयर प्रणाली परियोजना स्थल पर पहुंच चुकी है। सितंबर 2026 से टीबीएम के माध्यम से मुख्य सुरंग की खुदाई शुरू करने की योजना है। निरीक्षण के दौरान बांगर ने उपचारित जल (ट्रीटेड वॉटर) के पुनः उपयोग से संबंधित परियोजनाओं की भी समीक्षा की। घाटकोपर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से भांडुप कॉम्प्लेक्स तथा धारावी से घाटकोपर तक प्रस्तावित जल सुरंगों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया।
जल संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर जोर
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, उपचारित जल परियोजनाओं के पूरा होने के बाद औद्योगिक और अन्य गैर-पेयजल उपयोगों के लिए पुनर्चक्रित जल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे पेयजल की बचत होगी और शहर में जल संसाधनों का अधिक प्रभावी एवं टिकाऊ प्रबंधन संभव हो सकेगा। निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता (जलापूर्ति परियोजना) चंद्रकांत चौधरी (Chief Engineer (Water Supply Projects) Chandrakant Chaudhary)सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और अभियंता उपस्थित थे।
