
नई दिल्ली : (New Delhi) लोकसभा में बुधवार को जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (Birth and Death Registration) (Amendment) विधेयक, 2026 पेश किया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Home Affairs Nityanand Rai) ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल सदन में रखा। इस विधेयक का उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल करना और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना है।
नए प्रावधानों के तहत जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी पर सख्त नियम लागू होंगे। यदि रजिस्ट्रेशन कराने में एक से दो साल की देरी होती है तो जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की लिखित मंजूरी अनिवार्य होगी। वहीं, दो साल से अधिक की देरी होने पर मामला सीधे अदालत जाएगा और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।
इस कानून के तहत अब पूरे देश के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी हिस्से में होने वाले जन्म या मृत्यु की जानकारी एक ही जगह ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इस डेटाबेस को मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों से भी जोड़ा जाएगा। कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, उसका नाम स्वतः मतदाता सूची में जुड़ जाएगा। वहीं, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर सरकारी रिकॉर्ड से उसका नाम आसानी से हटाया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी लाभ उठाने की घटनाओं पर रोक लगेगी।
नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र (birth certificate) सबसे मुख्य दस्तावेज बन जाएगा। अब तक स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस या सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र ही उम्र और पहचान का एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा।
