
धीरज सिंह
मुंबई : (Mumbai) मुंबई में हर साल बढ़ती पानी की मांग और मानसून पर निर्भरता के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) (बीएमसी) ने बड़ा कदम उठाया है। शहर और महाराष्ट्र का पहला डिसैलिनेशन (समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाला) प्लांट मनोरी (Manori) में बनाया जाएगा। इस परियोजना से रोजाना 400 मिलियन लीटर तक पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भविष्य में जल संकट कम करने में मदद मिलेगी।
जलाशयों पर बढ़ता दबाव, हर दिन 600 एमएलडी तक की कमी
फिलहाल मुंबई को सात जलाशयों से प्रतिदिन लगभग 4,100 मिलियन लीटर पानी मिलता है, जबकि शहर की दैनिक आवश्यकता 4,664 मिलियन लीटर है। लगातार बढ़ती आबादी, पुनर्विकास और ऊंची इमारतों के कारण पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस वर्ष मानसून में देरी के चलते जलाशयों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया और बीएमसी को पूरे शहर में पानी की कटौती लागू करनी पड़ी।
2029 तक शुरू होगा पहला चरण
करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट का पहला चरण 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रतिदिन 200 मिलियन लीटर पानी मिलेगा। इसके बाद क्षमता बढ़ाकर 400 मिलियन लीटर प्रतिदिन की जाएगी। 12 एकड़ में बनने वाला यह प्रोजेक्ट इजरायल की आधुनिक रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) (Reverse Osmosis) तकनीक पर आधारित होगा। इजरायल की आईडीई टेक्नोलॉजीज संयंत्र का निर्माण और 20 वर्षों तक संचालन करेगी, जबकि सिविल कार्य जीवीपीआर इंजीनियर्स करेगी।
पर्यावरणीय मंजूरियों के साथ शुरू होगी निर्माण प्रक्रिया
मनोरी परियोजना को महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (Management Authority and the Union Ministry of Environment) से आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं। परियोजना में समुद्री पर्यावरण, मैंग्रोव, मछुआरों की आजीविका और अधिक नमकीन पानी के सुरक्षित निस्तारण को लेकर विशेष शर्तें लागू की गई हैं। मानसून समाप्त होते ही निर्माण कार्य तेज गति से शुरू किया जाएगा।
जलाशयों के साथ वैकल्पिक स्रोतों पर भी जोर
बीएमसी केवल डिसैलिनेशन तक सीमित नहीं है। गर्गई बांध और वर्सोवा (Gargai Dam and a second proposed desalination plant in Versova) में प्रस्तावित दूसरे डिसैलिनेशन प्लांट सहित तीन परियोजनाओं से कुल 1,040 मिलियन लीटर अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने की योजना है। साथ ही सात बड़े सीवेज शोधन संयंत्रों से उपचारित जल का औद्योगिक और अन्य गैर-पेय उपयोग बढ़ाकर ताजे पानी पर दबाव कम किया जाएगा। भविष्य में इस पानी को उन्नत तकनीक से पेयजल में बदलने की भी तैयारी है।
इजरायल मॉडल से मिलेगी जल सुरक्षा
इजरायल समुद्री जल को मीठा बनाकर अपनी 70 प्रतिशत से अधिक पेयजल जरूरत पूरी करता है। उसी अनुभव को आधार बनाकर मुंबई में यह परियोजना विकसित की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और बढ़ती आबादी (climate change, erratic monsoons, and a growing population) को देखते हुए भविष्य में जलाशयों, डिसैलिनेशन और पुनर्चक्रित जल—तीनों स्रोतों का संतुलित उपयोग ही महानगर की जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
हरित ऊर्जा से चलेगा प्लांट
बीएमसी का दावा है कि मनोरी डिसैलिनेशन प्लांट (Manori desalination plant) को सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से संचालित किया जाएगा। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी भंडारण प्रणाली के संयोजन से संयंत्र को चौबीसों घंटे हरित बिजली उपलब्ध कराने की योजना है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो यह देश का पहला पूर्णतः नवीकरणीय ऊर्जा आधारित डिसैलिनेशन प्लांट होगा।
