
जमानत याचिका खारिज
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान (Former Delhi MLA Naresh Balyan) को मकोका केस में दिल्ली उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिल पाई। न्यायमूर्ति मनोज जैन (Justice Manoj Jain) ने बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने 27 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस केस में राऊज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने 5 मई 2025 को दिल्ली पुलिस की बाल्यान समेत पांच आरोपितों के खिलाफ दाखिल पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि बाल्यान के खिलाफ मकोका का केस बनता है।
दिल्ली पुलिस कहा था कि 2019 की एफआईआर में आपराधिक सांठगांठ का खुलासा 2024 में हो गया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमित प्रसाद (Special Public Prosecutor Amit Prasad) पेश हुए। प्रसाद ने मकोका के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह से अपराध में मदद करता है तो वो मकोका के दायरे में आता है।
अमित प्रसाद ने कहा था कि चार्जशीट में गिरोह का जिक्र किया गया है। इसमें केवल एक व्यक्ति की भूमिका की बात नहीं है। 2019 में दर्ज एफआईआर में जो व्यक्ति चश्मदीद गवाह था उसकी 2024 में हत्या कर दी गई। इससे आरोपी के सांठगांठ का पता चलता है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बाल्यान की ओर से पेश वकील विवेक जैन ने कहा था कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मकोका का आरोप नहीं बनता है, क्योंकि इसके लिए निरंतर अपराध होना जरूरी है, जबकि एफआईआर में कोई नया अपराध या कोई नई गतिविधि दर्ज नहीं की गई है।
महत्वपूर्ण है कि दिल्ली पुलिस ने वसूली के मामले में नरेश बाल्यान (Naresh Balyan) को 30 नवंबर 2024 की रात गिरफ्तार किया था। चार दिसंबर को इस केस में बाल्यान को जमानत मिल गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पूर्व विधायक को मकोका के केस में गिरफ्तार किया।
