
नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस महासचिव (Communications) जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने ई20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि 29 जुलाई को संसद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए जवाब से जितने सवालों के उत्तर मिले, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर ई20 को पूरी तरह सुरक्षित बता रही है, जबकि दूसरी ओर उपभोक्ताओं के अनुभव और विभिन्न तकनीकी दस्तावेज कई अहम चिंताएं सामने रखते हैं।
जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने संसद में कहा था कि ई20 ईंधन को वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के वाहन मालिक और मैकेनिक माइलेज में कमी, इंजन के प्रदर्शन में गिरावट, 2023 से पहले बने वाहनों की ई20 के साथ अनुकूलता, कोल्ड-स्टार्ट की समस्या, इंजन के तेजी से घिसने, फ्यूल इंजेक्टर जाम होने, फ्यूल लाइन में जंग लगने तथा रबर के पुर्जों में दरार आने जैसी शिकायतें लगातार उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जून 2026 में 2023 से पहले बने पेट्रोल वाहनों के 44 हजार से अधिक मालिकों पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में लोगों ने ई20 लागू होने के बाद अपने वाहनों पर प्रतिकूल प्रभाव महसूस होने की बात कही है।
उन्होंने दावा किया कि सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बायोफ्यूल से वाहनों को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके बावजूद जुलाई 2026 की ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Automotive Research Association of India) (ARAI) की रिपोर्ट और नीति आयोग के 2021 के एथेनॉल पॉलिसी रोडमैप में ई20 के उपयोग से जुड़े कुछ तकनीकी प्रभावों का उल्लेख किया गया है। इन दस्तावेजों में ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में रबर के पुर्जों के तेजी से खराब होने, फ्यूल टैंक और अन्य धातु के हिस्सों में जंग लगने तथा कुछ श्रेणी के वाहनों में ईंधन दक्षता कम होने जैसी बातों का जिक्र है।
जयराम ने कहा कि ई20 को लेकर लोगों में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। सरकार को इस विषय पर उपलब्ध सभी वैज्ञानिक अध्ययन और आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं की आशंकाओं का तथ्यात्मक आधार पर समाधान हो सके।
