
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि युवाओं के साथ सख्ती से पेश आने के बजाए उन्हें समझना और उनसे बातचीत करना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) ने कहा कि अगर कुछ भटके हुए लोग पत्थरबाजी कर भी दें, तब भी युवाओं को समझाना और उनसे बातचीत करना जरूरी है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि युवाओं को सलाह और काउंसलिंग की जरूरत होती है। अगर सरकार बहुत सख्ती या आक्रामक रवैया अपनाएगी, तो समाज में तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए ऐसी स्थिति से बचा जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जरूरत युवाओं को सुनने और समझने की है कि वे क्यों नाराज हैं और क्यों नारे लगा रहे हैं। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आखिरकार यह फैसला कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों पर छोड़ देना चाहिए। उन्हें इस तरह की परिस्थितियों से निपटने का अनुभव है। वे आपसे और हमसे बेहतर जानते हैं कि ऐसी स्थिति को कैसे संभालना है।
उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में अभद्र गालियों का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को नसीहत देने के लिए सात दिनों की ‘कम्युनिटी सर्विस’ (community service) दी जाए। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।
पिछले दिनों काकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) ने पेपर लीक के मामले में जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था। छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की ओर से ज्यादती की शिकायतें मिली थीं।
