
मोहम्मद मुकीम शेख
मुंबई : (Mumbai) महापौर रितु तावड़े (Mayor Ritu Tawde) के आधिकारिक बंगले के आसपास प्रस्तावित करीब 3 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक विवाद (political controversy) खड़ा हो गया है। विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद महापौर ने स्वयं (बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) (बीएमसी) प्रशासन से संबंधित निविदा वापस लेने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि निविदा दस्तावेज में महापौर बंगले का नाम गलती से शामिल हो गया था।
क्या है पूरा मामला?
महापौर रितु तावड़े के अनुसार, यह निविदा बीएमसी के प्राणी उद्यान विभाग द्वारा जारी की गई थी। इसमें महापौर के आधिकारिक बंगले के आसपास के क्षेत्र में कुछ बुनियादी सुविधाओं और ढांचागत विकास कार्यों का प्रस्ताव शामिल था। हालांकि, दस्तावेज में महापौर बंगले का उल्लेख होने के कारण विवाद पैदा हो गया। महापौर ने बताया कि उन्होंने बीएमसी प्रशासन (BMC administration) को इस त्रुटि की जानकारी दी, जिसके बाद प्रशासन ने गलती स्वीकार करते हुए निविदा वापस लेने का निर्णय लिया। रितु तावड़े ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने आधिकारिक आवास के लिए किसी भी प्रकार के नए निर्माण या विशेष सुविधा की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि जिस विरासत भवन में महापौर का आधिकारिक आवास स्थित है, उसका हाल ही में लगभग 2.4 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण किया गया है। ऐसे में अतिरिक्त कार्यों की आवश्यकता नहीं थी। उनके अनुसार विवादित निविदा का उनके निवास से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
विपक्ष ने उठाए थे खर्च पर सवाल
विवाद उस समय बढ़ गया जब निविदा में कंटेनर आधारित सम्मेलन कक्ष, ध्वनि अवरोधक दीवार और अन्य संरचनात्मक सुविधाओं के निर्माण का प्रस्ताव सामने आया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे (Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) leader Aaditya Thackeray) ने इस पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि महापौर के आधिकारिक आवास के आसपास इतने बड़े खर्च की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
महापौर ने आरोपों को बताया भ्रामक
महापौर रितु तावड़े ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह परियोजना प्राणी उद्यान विभाग की थी और इसका उद्देश्य रानी बाग परिसर के आसपास की सुविधाओं को बेहतर बनाना था। उन्होंने कहा कि इसे महापौर बंगले से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है। उनका आरोप है कि विपक्ष इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है।
