
सना/रियाद : (Sana’a/Riyadh) सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान (Saudi Arabia, Turkey, and Pakistan) के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते पर यमन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यमन की सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के अध्यक्ष महदी अल-मशात ने चेतावनी दी कि सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या घेराबंदी में शामिल होने वाले देश को “हमलावर” माना जाएगा।
हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक संयुक्त रक्षा समझौते (joint defense agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
समझौते के बाद यमन की राजधानी सना से विरोध के स्वर सामने आए। महदी अल-मशात (Mahdi al-Mashat) ने कहा कि इस समझौते को यमन के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यमन अपनी “घेराबंदी के बदले घेराबंदी” की नीति तब तक जारी रखेगा, जब तक उसके घोषित उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते।
यमन के विदेश मंत्रालय (Yemen’s Foreign Ministry) ने भी इस समझौते पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मुस्लिम देश के खिलाफ दबाव बढ़ाने वाले क्षेत्रीय गठबंधनों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। मंत्रालय ने सऊदी अरब से यमन के खिलाफ कथित सैन्य कार्रवाई और घेराबंदी समाप्त करने की मांग की।
गौरतलब है कि यमन और सऊदी अरब के बीच संघर्ष 2015 से जारी है। इस युद्ध में हजारों लोगों की जान गई है और यमन गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में नया रक्षा समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन-सऊदी संबंधों पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
