
उल्हासनगर : (Ulhasnagar) कभी स्थापना दिवस पर उत्सव और उल्लास से सराबोर रहने वाला उल्हासनगर (Ulhasnagar) इस बार अपनी बदहाल स्थिति के कारण सवालों के घेरे में रहा। 8 अगस्त को उल्हासनगर महानगरपालिका (Ulhasnagar Municipal Corporation) मुख्यालय के पीछे स्थित विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब जलतरण तालाब परिसर में शिलालेख के पास शहर का 78वां स्थापना दिवस (78th Foundation Day) मनाया गया। शासन-प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता वाले इस आयोजन के बीच शहर की बुनियादी समस्याओं ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
करोड़ों के फंड के बाद भी सड़कें बदहाल
उल्हासनगर की अधिकांश सड़कें खस्ताहाल हैं। नई बनी सीमेंट की सड़कों पर भी कई जगह दरारें पड़ चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भूमिगत गटर योजना का अपेक्षित लाभ नागरिकों को नहीं मिल पा रहा है। पानी की पाइपलाइन बिछाने के बाद भी कई इलाकों में नागरिकों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। जगह-जगह गंदगी और प्रदूषण से भी नागरिक परेशान हैं।
700 करोड़ से ज्यादा का कर्ज, विकास कार्य प्रभावित
महानगरपालिका पर 700 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बताया जा रहा है। आर्थिक संकट के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हैं। दिव्यांगों, ठेका कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं जैसे महत्वपूर्ण कर्मियों को वेतन और भत्तों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। सरकारी और मनपा अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाओं तथा चिकित्सा कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं। शहर में कई जर्जर इमारतें आज भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इनमें रहने वाले परिवारों के साथ सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। दूसरी ओर, आर्थिक संकट के बीच नगरसेवकों के गुवाहाटी प्रशिक्षण दौरे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
व्यापार और विविधता के लिए है खास पहचान
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित उल्हासनगर (Thane district of Maharashtra) का क्षेत्रफल करीब 13.50 वर्ग किलोमीटर है। शहर की स्थापना जनवरी 1960 में हुई थी। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 5.06 लाख से अधिक आबादी थी, जबकि महानगरपालिका के 2025 के अनुमान के अनुसार आबादी करीब 7.37 लाख हो चुकी है। कपड़ा, जींस, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, प्लास्टिक और अन्य छोटे-मझोले कारोबार शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में 78वां स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि यह विचार करने का भी मौका है कि करोड़ों रुपये के फंड और मजबूत कारोबारी पहचान के बावजूद उल्हासनगर बुनियादी सुविधाओं के मामले में अब भी पीछे क्यों है।
