
नई दिल्ली : (New Delhi) लोकसभा में मंगलवार को केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम्’ (Keralaam) किए जाने से जुड़ा विधेयक शोर-शराबे के बीच बिना किसी चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय (Union Minister of State for Home Affairs Nityanand Rai) ने आज सदन में शोर-शराबे के बीच केरल (Alteration of Name) विधेयक, 2026 चर्चा हेतु पेश किया और संक्षिप्त में जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक के पारित किए जाने के कुछ कांग्रेस सांसदों ने विरोध किया है। दूसरी संसदीय कार्यमंत्री ने किरेन रिजिजू (Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju) ने विधेयक पारित होने के बाद दुख जताया कि विधेयक पर वरिष्ठ सदस्य केसी वेणुगोपाल को बोलने का अवसर नहीं मिला।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में पिछले दो सप्ताह से जारी व्यवधान आज भी जारी रहा। शोर-शराबे बीच सरकार लगातार दोनों सदनों में कुछ आवश्यक विधायी कार्य पूरा करा रही है। इसी क्रम में आज केरल राज्य का नाम बदले जाने से जुड़ा विधेयक बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया।
मलयालम भाषा में राज्य को पारंपरिक रूप से ‘केरलम’ ही कहा जाता है। विधेयक इसी सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक दर्जा देने के लिए लाया गया है। इसके तहत भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। नाम परिवर्तन के साथ-साथ राज्य से संबंधित अन्य संवैधानिक तथा प्रशासनिक दस्तावेजों में आवश्यक परिणामी संशोधन भी शामिल होंगे।
केरल विधानसभा (Kerala Legislative Assembly) ने 24 जून, 2024 को सर्वसम्मति से एक संकल्प पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने का अनुरोध किया गया था। इस संकल्प में कहा गया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत आवश्यक कदम उठाते हुए पहली अनुसूची में संशोधन किया जाए और राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किया जाए।
संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति ने इस विधेयक को अपनी राय व्यक्त करने के लिए केरल राज्य विधानमंडल को भेजा था। केरल विधानसभा ने ‘केरल (Alteration of Name) विधेयक, 2026’ पर गहन विचार-विमर्श किया और सर्वसम्मति से विधेयक को पारित किया गया।
