
नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डायन बताकर महिलाओं को प्रताड़ित करने जैसी गलत प्रथाएं जारी रहेंगी, तो देश में लोकतंत्र नहीं टिक सकता। कोर्ट ने ओडिशा में 1998 में एक महिला को डायन बताकर घर से बाहर खींचने और पीटने वाले व्यक्ति की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। इस हमले में महिला की मौत हो गई थी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया (Justices Prashant Kumar Mishra and N.V. Anjaria) की बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि इस मामले में महिला की बेटी ने अपनी मां को बेहद क्रूर तरीके से मारे जाते देखा था।
फरवरी 1998 में लड़की की मौत के बाद हुआ हमला
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले (Odisha’s Sundargarh district) के गांव में फरवरी 1998 में एक लड़की की मौत हुई थी। उसके परिवार के एक सदस्य ने दावा किया था कि लड़की की मौत पीड़ित महिला की डायन विद्या के कारण हुई। इसके बाद आरोपी और उसकी साथी महिला को उसके घर से बाहर खींचकर लाए। दोनों ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना महिला की बेटी ने देखी थी। बेटी की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी और सह-आरोपी को हत्या समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया उम्रकैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने कुप्रथा पर जताई चिंता
बेंच ने कहा, भारत का संविधान समानता, भाईचारे और वैज्ञानिक सोच के सिद्धांतों पर आधारित समाज की कल्पना करता है। हमें पूरी उम्मीद है कि यह मामला गंभीर याद दिलाएगा कि अंधविश्वास और तर्कहीन मान्यताओं पर हमेशा न्याय की जीत होनी चाहिए। डायन बताकर हिंसा की क्रूरता केवल हत्या तक सीमित नहीं रहती। इसमें ज्यादातर महिलाओं को यातना, मारपीट, यौन हिंसा और समाज से अलग किए जाने का सामना करना पड़ता है।
