
लोकसभा की कार्यवाही पहली बार वंदे मातरम से शुरू हुई
स्पीकर की टी पार्टी का विपक्ष ने किया बहिष्कार
नई दिल्ली : (New Delhi) संसद के मानसून सत्र (day of Parliament’s monsoon session) के अंतिम दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सहित विभिन्न दलों के सांसद सदन में उपस्थित रहे। राष्ट्रगीत के छह अंतरे प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा की कार्यवाही भी राष्ट्रगीत के साथ समाप्त हुई।
एक मिनट से भी कम चली कार्यवाही
वंदे मातरम के गायन के बाद लोकसभा की कार्यवाही संक्षिप्त रूप से चली और फिर मानसून सत्र समाप्त होने की घोषणा कर दी गई। 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चला।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Congress MP Priyanka Gandhi Vadra) ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह अंतिम दिन केवल वंदे मातरम गाने के लिए सदन में आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे सत्र के दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में पर्याप्त उपस्थिति नहीं रही, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने पूरे वंदे मातरम के गायन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अब राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण अधिकांश लोगों को याद नहीं है।
स्पीकर की चाय पार्टी का विपक्ष ने किया बहिष्कार
लोकसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद स्पीकर ओम बिरला (Speaker Om Birla) ने परंपरागत चाय पार्टी का आयोजन किया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इसका बहिष्कार किया। हालांकि डीएमके सांसद कनिमोझी इसमें शामिल हुईं। दूसरी ओर, राज्यसभा के सभापति की ओर से आयोजित चाय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया।
लोकसभा में सिर्फ 1 दिन ही चर्चा हो पाई: किरेन रिजिजू
संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद केंद्रीय संसदीय मंत्री कार्यमंत्री किरेन रिजिजू (Union Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि संसदीय सत्र में 12 बिल पास हुए। लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी काम हुआ। लोकसभा में सिर्फ 1 दिन ही चर्चा हो पाई, नए सासंदों को अच्छी चर्चा का मौका नहीं मिला। लोकसभा में विपक्ष ने सदन में चर्चा नहीं होने दी और चर्चा से भागने के लिए बहाने बनाए। विपक्षी सांसद सिर्फ नारेबाजी के लिए संसद आए। संसदीय लोकतंत्र के लिए ये ठीक नहीं है।
