
नई दिल्ली : (New Delhi) हैदराबाद स्थित नेशनल अकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (National Academy of Legal Studies and Research) (नालसार) के अंतिम वर्ष के लॉ स्टूडेंट का एनरोलमेंट रोकने संबंधी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) (Bar Council of India) के सर्कुलर पर देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Surya Kant) ने सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि बीसीआई का रुख बिल्कुल गलत है। यह लॉ स्टूडेंट और मेरे बीच का मामला है। बीसीआई कौन होते हैं मुद्दा उठाने वाले। यह बिल्कुल गलत है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अपने छात्र दिनों में मैं भी स्टूडेंट एक्टिविटीज में सक्रिय रूप से शामिल रहा हूं। यह मानते हुए भी कि अगर वे गलत हैं, तो भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है। बीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि किसी भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी या लॉ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट या फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने बीसीआई को नोटिस जारी करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
13 अगस्त को बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा (BCI Chairman Manan Kumar Mishra) के हस्ताक्षर से एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें नालसार के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश के शामिल होने का विरोध करने वाले छात्रों को बतौर वकील रजिस्ट्रेशन करने पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था।
मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी इस सर्कुलर का जमकर विरोध हो रहा है। केरल बार काउंसिल और बीसीआई सदस्य एन मनोज कुमार ने विरोध जताते हुए मनन मिश्रा को पत्र लिखा। वकीलों के संगठन ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) (All India Lawyers Union (AILU) and the Supreme Court Bar Association (SCBA) ने भी मनन मिश्रा के इस सर्कुलर की आलोचना करते हुए वापस लेने की मांग की।
बढ़ते विरोध के बाद मनन मिश्रा ने छात्रों का बतौर वकील रजिस्ट्रेशन नहीं करने के पहले के आदेश को 13 अगस्त को ही वापस भी ले लिया। अब इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सीजेआई ने मनन मिश्रा के कदम को गैरजरूरी बताया है।
