
नई दिल्ली : (New Delhi) भारत के प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India) (CJI) सूर्यकांत (Surya Kant) ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो बिना पर्याप्त संदर्भ के प्रसारित किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उनकी एक मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और दुर्भावनापूर्ण ढंग से इस्तेमाल कर देश के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई।
‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर दी सफाई
सीजेआई ने डीडी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में की गई अपनी टिप्पणी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया और उसे ऐसे प्रस्तुत किया गया, मानो उन्होंने कुछ और कहा हो। उनके अनुसार, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे युवाओं के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया।
मीडिया से जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपील
प्रधान न्यायाधीश ने मीडिया और सोशल मीडिया मंचों से न्यायिक कार्यवाही की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक के अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। समाज में सद्भाव बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
न्यायिक सामग्री के दुरुपयोग पर जताई चिंता
सीजेआई ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति प्रसारित करने, दोबारा अपलोड करने और उससे आर्थिक लाभ कमाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोग छोटे-छोटे वीडियो क्लिप का उपयोग निजी और व्यावसायिक लाभ के लिए कर रहे हैं, जिस पर रोक लगनी चाहिए।
पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है न्यायपालिका
सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि न्यायपालिका पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की कार्यवाही का लाइव प्रसारण शुरू किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता का उद्देश्य जनहित है, न कि व्यावसायिक लाभ। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के सीधे प्रसारण का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
