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Mumbai : सुपर सीएम बने देवेंद्र फडणवीस!

Mumbai: Devendra Fadnavis becomes Super CM!

सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचित की नई नियमावली
मुख्यमंत्री को मंत्रियों के स्वतंत्र फैसलों में दखल और बिना बैठक फाइलें मंगाने का मिला कानूनी अधिकार
बिना कैबिनेट बैठक ‘सर्कुलेशन’ के जरिए भी लिए जा सकेंगे अहम फैसले
मुंबई : (Mumbai)
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार (Devendra Fadnavis government in Maharashtra) ने हाल ही में सरकारी कामकाज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव को लेकर राज्य में सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों से मुख्यमंत्री फडणवीस को ‘सुपर सीएम’ (Super CM) जैसी शक्तियां मिल गई हैं। दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 80वें स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को ‘महाराष्ट्र शासकीय कार्य नियमावली, 2026’ अधिसूचित की। इन नए नियमों ने 1975 से लागू पुराने नियमों की जगह ली है।

मंत्री के फैसले की समीक्षा कर सकेंगे मुख्यमंत्री
नई नियमावली के तहत मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के फैसले की समीक्षा करने और जनहित में उसमें बदलाव करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, इसके लिए मुख्यमंत्री को यह बताना होगा कि फैसला जनहित में लिया गया है और इसके लिखित कारण भी दर्ज करने होंगे। संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत राज्य सरकार के कामकाज को संचालित करने के लिए ‘कामकाज के नियम’ पहले से लागू हैं। नए नियमों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के अधिकारों को लेकर पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

2023 के अदालती फैसले के बाद बदले नियम
नए नियमों की जरूरत की पृष्ठभूमि 2023 के एक चर्चित अदालती मामले से जुड़ी है। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Chief Minister Eknath Shinde) ने तत्कालीन सहकारिता मंत्री अतुल सावे के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक में भर्ती की अनुमति दी गई थी। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर पीठ ने 3 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री के स्थगन आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि 1975 के नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास किसी विभागीय मंत्री के स्वतंत्र फैसले की समीक्षा करने या उसे बदलने का अधिकार नहीं था। अब नए नियमों के जरिए इसी कानूनी स्थिति को बदलते हुए मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के लिए स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

फाइलें मंगाने का भी अधिकार
नई नियमावली के तहत मुख्यमंत्री किसी भी विभाग से दस्तावेज या फाइल मंगा सकते हैं। संबंधित मंत्री और विभाग के सचिवों के लिए मुख्यमंत्री को ये फाइलें उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा कैबिनेट के कुछ फैसले ‘सर्कुलेशन’ के जरिए भी लिए जा सकेंगे। यानी यदि सभी मंत्री सहमत हों और मुख्यमंत्री को बैठक बुलाना जरूरी न लगे, तो बिना औपचारिक बैठक के भी निर्णय लिया जा सकेगा।

मुख्य सचिव और वित्त विभाग की भूमिका मजबूत
नए नियमों में मुख्य सचिव की भूमिका को भी मजबूत किया गया है। यदि कोई प्रस्तावित फैसला कानून या सरकारी नीति के खिलाफ जाता है, तो मुख्य सचिव मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री को सलाह दे सकते हैं। वहीं, वित्तीय प्रभाव वाले किसी भी आदेश के लिए वित्त विभाग की पूर्व सहमति जरूरी होगी।

कुछ मामलों में राज्यपाल को भी जानकारी
नई नियमावली में राज्यपाल की भूमिका से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। शांति और व्यवस्था, केंद्र-राज्य संबंध, अध्यादेश तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों से जुड़े 22 श्रेणियों के मामलों में आदेश जारी करने से पहले मुख्यमंत्री को प्रस्ताव राज्यपाल के समक्ष रखना होगा।

महायुति में सत्ता संतुलन पर सवाल
नए नियमों को प्रशासनिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक असर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। महायुति सरकार में मंत्रियों के पास अपने विभागों से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। ऐसे में मुख्यमंत्री को उनके फैसलों की समीक्षा और उनमें बदलाव का अधिकार मिलने से सत्ता का संतुलन मुख्यमंत्री के पक्ष में मजबूत होने की चर्चा है। खास बात यह है कि 2023 में जिस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Chief Minister Eknath Shinde) के अधिकार पर सवाल उठा था, उस समय शिंदे मुख्यमंत्री थे और आज वह उपमुख्यमंत्री हैं।

पहली बार इस्तेमाल पर टिकी नजर
फिलहाल मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा नए नियमों के तहत किसी मंत्री के फैसले को औपचारिक रूप से बदलने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, मुख्यमंत्री पहली बार इस अधिकार का इस्तेमाल कब और किस मामले में करते हैं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। नए नियमों का असर फडणवीस और शिंदे के बीच सत्ता संतुलन तथा महायुति सरकार की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ सकता है।