
नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्य के ‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के अगले चरण में खाद्य तेल को प्रमुख फोकस बनाने की घोषणा की है। उन्होंने खुले तेल की बिक्री से लेकर खाना पकाने के तेल के बार-बार इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुंढे के मुताबिक, खाद्य तेल के उत्पादन, पैकेजिंग, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन अब पूरी सप्लाई चेन में सुनिश्चित किया जाएगा।
खुले तेल पर क्यों जताई गई चिंता?
तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) ने खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर चेताया कि ऐसे तेल में उसके निर्माण के स्रोत और तारीख की स्पष्ट जानकारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि खुले तेल या अन्य खाद्य तेल में यह पता नहीं चलता कि इसे कहां और कब बनाया गया, जिससे फूड पॉइजनिंग जैसी घटना होने पर कार्रवाई शुरू करना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाता है। यानी किसी खाद्य सुरक्षा घटना की स्थिति में उत्पाद के स्रोत तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है।
टिन के दोबारा इस्तेमाल पर भी होगी सख्ती
अभियान के दायरे में तेल की पैकेजिंग भी आएगी। महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख ने खास तौर पर पैकेजिंग के लिए टिन के दोबारा इस्तेमाल का मुद्दा उठाया और स्पष्ट किया कि यह प्रचलित नियमों के तहत अनुमति प्राप्त नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अभियान के अगले चरण में निर्माताओं, वितरकों, दुकानदारों और अन्य कारोबारियों की गतिविधियों पर पहले से कहीं अधिक निगरानी रखी जाएगी।
बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल सबसे बड़ा खतरा
मुंढे ने खाना पकाने के तेल को बार-बार इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को सबसे गंभीर और खतरनाक चिंताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि खाद्य कारोबारियों की ओर से तेल का किस तरह इस्तेमाल और दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है, इस पर अभियान में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
उत्पादन, पैकेजिंग, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े नियमों के पालन को अनिवार्य बताते हुए मुंढे ने उल्लंघनकर्ताओं को सख्त चेतावनी दी। उनके मुताबिक, नियमों के उल्लंघन के मामलों में 10 लाख रुपये तक के जुर्माने और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
FSSAI के नियमों का हवाला
मुंढे ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India) (FSSAI) ने खाद्य तेल के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय कर रखे हैं, लेकिन अधिकारियों के सामने इनके उल्लंघन के कई मामले आए हैं। उन्होंने कहा कि एफडीए के आदेशों का पालन पूरी सप्लाई चेन में करना अनिवार्य होगा, और निर्माताओं के पास संबंधित नियमों के तहत जरूरी लाइसेंस भी होना चाहिए।
सेहत पर पड़ने वाला असर भी चिंता का विषय
मुंढे ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ ब्लैक मार्केट या मिलावट तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, खाद्य तेल से जुड़ी असुरक्षित प्रक्रियाएं व्यापक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती हैं — जिनमें हृदय रोग और कैंसर का बढ़ता खतरा, तथा बच्चों के संज्ञानात्मक विकास पर नकारात्मक असर शामिल है। उन्होंने आगाह किया कि ऐसी प्रथाएं समाज में महामारी जैसी स्थिति भी पैदा कर सकती हैं।
आगे क्या होगा?
‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान अब खाद्य तेल को लेकर उत्पादन से लेकर लाइसेंसिंग, पैकेजिंग, वितरण और खुदरा बिक्री तक — हर स्तर पर केंद्रित रहेगा। साथ ही, खाद्य कारोबारियों द्वारा तेल के इस्तेमाल और पुनः इस्तेमाल की प्रक्रिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने उत्पाद के स्रोत और निर्माण से जुड़ी स्पष्ट जानकारी को खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम बताया है।
