
कोलकाता : (Kolkata) तृणमूल सांसद सायोनी घोष (Trinamool MP Saayoni Ghosh) ने पश्चिम बंगाल में विमानन ढांचे के विस्तार (expansion of aviation infrastructure in West Bengal) को लेकर पांच प्रमुख प्राथमिकताओं की जानकारी दी है। शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर उन्होंने बताया कि मैसूर में नागरिक उड्डयन संबंधी (Consultative Committee on Civil Aviation in Mysuru) परामर्शदात्री समिति की बैठक में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत अन्य सांसदों (Union Civil Aviation Minister Rammohan Naidu, Minister of State Murlidhar Mohol, and other MPs) के साथ उन्होंने राज्य से जुड़े मुद्दे उठाए।
सायोनी घोष के अनुसार, बैठक में पश्चिम बंगाल के पांच प्रमुख विमानन मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख हवाई अड्डों और विमानन सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
सायोनी घोष ने कालाइकुंडा, हाशिमारा, मालदा, बालुरघाट और पुरुलिया हवाई अड्डों (Kalaikunda, Hashimara, Malda, Balurghat, and Purulia airports) को वर्ष 2028 तक पूरी तरह परिचालन में लाने के लिए समयबद्ध योजना बनाने की बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Netaji Subhash Chandra Bose International Airport) के व्यापक आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही कोलकाता में बढ़ते यात्रियों के दबाव को देखते हुए दूसरे हवाई अड्डे की योजना तैयार करने की मांग रखी। उन्होंने कोलकाता से ब्रिटेन और अमेरिका के लिए सीधी उड़ानों की सुविधा बढ़ाने की जरूरत भी बताई।
सायोनी घोष ने पश्चिम बंगाल में विमानन क्षेत्र से जुड़े रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने के लिए कोलकाता, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख केंद्रों में डीजीसीए से मान्यता प्राप्त फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन स्थापित करने की मांग की।
उन्होंने राज्यभर में हेलिपैड का नेटवर्क विकसित करने का सुझाव दिया। इसके तहत अलग-अलग जिलों में, लगभग 150 से 200 किलोमीटर के अंतराल पर हेलिपैड विकसित करने की बात कही गई। इससे क्षेत्रीय संपर्क, आपातकालीन सेवाओं और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई।
सांसद ने दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में छोटे हवाई अड्डों (small airports in Darjeeling and Kalimpong) के माध्यम से कनेक्टिविटी की संभावनाओं का अध्ययन करने की मांग भी रखी।
