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Mumbai : ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की हड़ताल

Mumbai: Auto-rickshaw drivers' strike

मुंबई : (Mumbai) मुंबई में ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों (Auto-rickshaw drivers in Mumbai) ने सरकार के मराठी भाषा संबंधी नियम के विरोध में सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू की है। गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों का कहना है कि इस नियम से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उम्रदराज ड्राइवरों ने कहा कि 55-60 साल की उम्र में परिवार चलाने के साथ नई भाषा सीखना उनके लिए मुश्किल है। हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि कई लोग मराठी सीखने और टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद उनका आरोप है कि अधिकारियों की ओर से नियम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देने के बजाय जुर्माना लगाया जा रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि 15-20 हजार रुपये का जुर्माना भरना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जब तक उन्हें उचित समय और राहत नहीं दी जाती, तब तक वे तीन दिन की हड़ताल जारी रखेंगे।

ऑटो-टैक्सी चालकों को राहत
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (Maharashtra Transport Minister Pratap Sarnaik) ने सोमवार को कहा कि मराठी सीखने की एक महीने की समयसीमा पूरी होने से पहले ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों पर गलत तरीके से जुर्माना लगाने वाले क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (Regional Transport Office) (आरटीओ) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पत्रकारों से बातचीत में सरनाईक ने स्पष्ट किया कि 12 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव में कहा गया था कि मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं रखने वाले ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को आरटीओ अधिकारी एक महीने का नोटिस देंगे। इस दौरान उन्हें मराठी सीखने का समय दिया जाएगा।

‘वर्किंग नॉलेज’ की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने सोमवार को कहा कि ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का नियम केवल बुनियादी बातचीत तक सीमित है। इसका उद्देश्य हिंदी बोलने वाले ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। फडणवीस ने कहा कि महायुति सरकार (Mahayuti government) भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। जरूरत पड़ने पर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों को काम चलाने लायक मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डी.एम. गोसावी ने कहा कि सरकार ने मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ जरूरी किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितनी मराठी जानना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि नियम स्पष्ट नहीं होने पर आरटीओ में भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका बढ़ सकती है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर दूसरे राज्यों से आते हैं और इनमें कई को मराठी नहीं आती या वे बहुत कम मराठी बोल पाते हैं।