
नई दिल्ली : (New Delhi) गोवा (Goa) में एक महिला को डिजिटल अरेस्ट (digital arrest) के नाम पर ठगने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने तीन और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ईडी ने 27 अगस्त को भुषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार किया। अदालत ने तीनों को एक सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मामला जून 2025 में दर्ज साइबर अपराध की प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप है कि गिरोह ने गोवा की एक महिला को वीडियो कॉल पर रखा और बताया कि वह एक आपराधिक मामले की जांच के घेरे में है। इसके बाद उसे डराकर कथित गुप्त निगरानी खाते में 2 करोड़ 60 लाख 33 हजार 634 रुपये स्थानांतरित करा लिए गए।
417 करोड़ रुपये की ठगी का नेटवर्क
जांच में ईडी को पता चला कि ठगी की रकम को खपाने के लिए बड़ा नेटवर्क बनाया गया था। रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजने के बाद नकदी में बदला जाता था और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया जाता था। ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क से 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 330 शिकायतें और 163 प्राथमिकी जुड़ी हैं। इनमें करीब 417.49 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट ने खड़ी कीं 21 कंपनियां
ईडी के मुताबिक गिरफ्तार भुषण मोये पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है। उस पर गिरोह के लिए 21 कंपनियां खड़ी करने और 43 कथित डमी निदेशकों के माध्यम से इन कंपनियों के संचालन में मदद करने का आरोप है। वहीं विलास पवार पर बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए ठगी की रकम पहुंचाने और शैलेश चव्हाण पर उसके बदले नकदी उपलब्ध कराने का आरोप है। ईडी ने तीनों आरोपितों के ठिकानों पर 21 अगस्त को तलाशी ली थी। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के बाद भी कथित तौर पर ठगी की रकम को खपाने का काम जारी रहा। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। मामले में ईडी की जांच जारी है।
