
स्टूल डोनर बनने की अपील
ठाणे : (Thane) स्वस्थ बच्चे का मल किसी जरूरतमंद मरीज के लिए उपचार का माध्यम बन सकता है। रेस्प्लाइस ऑटिज्म रिसर्च फाउंडेशन (Resplease Autism Research Foundation) के संयुक्त उपक्रम रेस्प्लाइस रिसर्च इनिशिएटिव ने ठाणे में महाराष्ट्र का पहला फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (fecal microbiota transplant) (FMT) थेरेपी सेंटर शुरू किया है। संस्था ने स्वस्थ बच्चों के अभिभावकों से स्टूल डोनर के रूप में आगे आने की अपील की है।
एफएमटी में स्वस्थ डोनर के मल से प्राप्त सूक्ष्मजीवों को ऐसे मरीज की आंत में पहुंचाया जाता है, जिसकी आंत का माइक्रोबायोम असंतुलित या प्रभावित हो गया है। संस्था के अनुसार, आंत में मौजूद सूक्ष्मजीव पाचन, मेटाबॉलिज्म और प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एफएमटी का उपयोग बार-बार होने वाले क्लोस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल संक्रमण (Clostridioides difficile infections) के चुनिंदा मामलों और अल्सरेटिव कोलाइटिस में स्थापित उपचार के रूप में किया जाता है।
संस्था के अनुसार, 3 से 12 वर्ष की आयु का स्वस्थ बच्चा संभावित स्टूल डोनर हो सकता है। बच्चे को कोई पुरानी बीमारी नहीं होनी चाहिए और पिछले तीन महीनों में एंटीबायोटिक या प्रोबायोटिक नहीं लिया होना चाहिए। टीकाकरण भी अद्यतन होना जरूरी है। डोनर बनने से पहले बच्चे की चिकित्सकीय, शारीरिक और प्रयोगशाला जांच की जाएगी।
स्क्रीनिंग में योग्य पाए जाने वाले डोनर्स को 20 हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि देने की बात संस्था ने कही है। इच्छुक अभिभावक 9821529653 पर संपर्क कर सकते हैं। रेस्प्लाइस फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी (Dr. Chandrashekhar Thodupunuri) ने कहा कि स्वस्थ डोनर से प्राप्त माइक्रोबियल समुदाय आंत के संतुलन को बहाल करने में मदद कर सकता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पांडु चौहान (Gastroenterologist Dr. Pandu Chauhan) ने एफएमटी को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
संस्था ने दावा किया है कि वह ऑटिज्म, एसएसपीई और अन्य स्थितियों में भी एफएमटी की संभावनाओं पर शोध कर रही है। हालांकि, इन स्थितियों में एफएमटी की प्रभावशीलता और सुरक्षा के दावों का चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।
