
मुंबई : (Mumbai) वसई की विधायक स्नेहा दुबे पंडित (Vasai MLA Sneha Dubey Pandit) ने बुधवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वसई-विरार शहर महानगरपालिका (Vasai-Virar City Municipal Corporation) (वीवीएमसी) के भोयदापाडा (गोखिवरे) स्थित डंपिंग ग्राउंड पर कचरा प्रसंस्करण और बायो-माइनिंग परियोजना में हुए कथित करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में बोलिंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एफआईआर त्रुटिपूर्ण और ठेकेदार तथा अधिकारियों को बचाने वाली है। इसलिए, इस अपराध के जांच का दायरा बढ़ाकर मामले के सभी वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं की जांच की जाए।
इस संबंध में मुख्यमंत्री को सौंपे गए विस्तृत पत्र में मांग की गई है कि बोलिंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में केवल फर्जी आरडीएफ प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई कथित ₹37.66 करोड़ की धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है। जबकि वास्तव में इस मामले में इससे भी अधिक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक पहलू शामिल हैं, इसलिए पूरक बयान दर्ज कर उन्हें इस जांच में शामिल किया जाए। इस पत्र के अनुसार, इस पूरे मामले में लगभग ₹64 करोड़ के वित्तीय घोटाले की आशंका है, और जांच को केवल एक आरोप तक सीमित न रखकर पूरे लेनदेन की वित्तीय कड़ियों की जांच करना आवश्यक है।
निविदा प्रक्रिया में पात्रता, वित्तीय क्षमता और प्रत्यक्ष रूप से काम लेने वाली संस्था के साथ किए गए नियम विरुद्ध समझौते व जारी कार्य आदेश के संबंध में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित धाराएं जोड़ने की मांग की गई है। इसके साथ ही, ठेकेदार द्वारा कचरे का घनत्व 340 किग्रा/घन मीटर से बढ़ाकर 480 किग्रा/घन मीटर दिखाकर बिलों में बड़े पैमाने पर की गई बढ़ोतरी, आरडीएफ तैयार करने की बात दिखाने के लिए प्रस्तुत किए गए फर्जी प्रमाणपत्र, कचरा प्रसंस्करण परियोजना के काम के दौरान प्राकृतिक पत्थरों के अवैध उत्खनन के मामले में गौण खनिज अधिनियम के उल्लंघन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से संबंधित कानूनी धाराओं को भी एफआईआर में शामिल करने की मांग की गई है।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि इस मामले में न केवल ठेकेदार, बल्कि महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी सलाहकारों और दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना भुगतान मंजूर करने वाले मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जाए। उन्हाेंने मामले के वित्तीय लेनदेन की वास्तविक सच्चाई सामने लाने के लिए साल 2023 से ठेकेदार को किए गए सभी भुगतानों का एक स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। साथ ही, यदि मामले की जांच में भ्रष्टाचार के जरिए वित्तीय लाभ लेने की बात साबित होती है, तो संबंधितों की चल-अचल संपत्ति और बैंक खातों को कानूनन फ्रीज/जब्त करके महानगरपालिका के वित्तीय नुकसान की वसूली की जाए। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाए गए जुर्माने और महानगरपालिका को हुए अन्य वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी तय कर संबंधितों से उसकी वसूली की जानी चाहिए।
