
एक भी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए: कोर्ट
राज्य सरकार को मेडिकल देखभाल के निर्देश
मुंबई : (Mumbai) बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने नासिक समेत महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड (Chief Justice Ravindra Ghuge and Justice Gautam Ankhad) की पीठ ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे एक भी व्यक्ति की जान नहीं जानी चाहिए। राज्य सरकार छात्रों की सेहत को लेकर उचित कदम उठाए और उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल उपलब्ध कराए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
नासिक में 13 दिन से भूख हड़ताल
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अशोक कवाडू मेश्राम (retired police officer Ashok Kavadu Meshram) की ओर से वकील रमेश दुबे-पाटिल ने जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि नासिक सिविल अस्पताल के पास आदिवासी छात्र पाहुल पावरा पिछले 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह आदिवासी आश्रम स्कूलों और हॉस्टलों की खराब स्थिति समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। राज्य के अन्य इलाकों में भी आदिवासी छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं।
सरकार ने उठाए गए कदमों की जानकारी दी
राज्य के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे (State Advocate General Dr. Milind Sathe) ने पीठ को बताया कि सरकार पहले ही इस मामले में कई कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास मंत्री, संबंधित अधिकारियों और छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर चर्चा की है। सरकार आदिवासी छात्रों की स्थिति को लेकर गंभीर है और प्रभावित इलाकों में आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।
जनहित याचिका में गंभीर घटनाओं का हवाला
याचिका में आदिवासी आश्रम स्कूलों और हॉस्टलों की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें अमरावती के एक आदिवासी आश्रम स्कूल में भोजन के बाद छात्रों की तबीयत बिगड़ने और फूड पॉइजनिंग से एक छात्र की मौत का दावा किया गया है। ठाणे जिले के शाहपुर स्थित टेम्बा आश्रम स्कूल (Temba Ashram School in Shahpur) में एक हेल्पर पर 22 नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप भी याचिका में लगाया गया है।
