
मुंबई : (Mumbai) हिंदी फिल्म संगीत में प्रेम को सिर्फ इजहार नहीं, बल्कि एहसास और रूहानियत देने वाले गीतकारों में इरशाद कामिल (Irshad Kamil) का नाम खास है। उनके गीतों में प्रेम, लगाव, समर्पण और जुदाई की भावनाएं बेहद सहज अंदाज में नजर आती हैं। बदलते दौर में रैप और हिप-हॉप के बीच भी उन्होंने अपने शब्दों की खूबसूरती कायम रखी है।
5 सितंबर 1971 को पंजाब के मालेरकोटला में जन्मे इरशाद कामिल ने पत्रकारिता की पढ़ाई की। वर्ष 2004 में ‘चमेली’ (Chameli) से गीतकार के तौर पर सफर शुरू करने के बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनके गीतों की सबसे खास बात हिंदी और पंजाबी का खूबसूरत मेल है।
‘आज दिन चढ़ेया’, ‘मौजा ही मौजा’ और ‘रब्बा मैं तो मर गया ओए’ जैसे गीतों में पंजाबी और हिंदी शब्दों का मेल उनकी खास शैली को दिखाता है। उनके गीतों में पंजाब की मिट्टी की खुशबू के साथ प्रेम की गहराई भी महसूस होती है।
इरशाद कामिल ने ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’, ‘रांझणा’, ‘संजू’, ‘जवान’, ‘डंकी’, ‘छावा’ और ‘सैयारा’ समेत कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। उनकी हालिया फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के गीतों को भी पसंद किया गया। दो दशक से ज्यादा के सफर में इरशाद कामिल ने साबित किया है कि संगीत का अंदाज भले बदल जाए, लेकिन दिल को छूने वाले शब्द कभी पुराने नहीं होते।
