
ढाका (बांग्लादेश) : (Dhaka) देश में न्यायपालिका के लिए पर्याप्त बजट आवंटन (budget allocation) सुनिश्चित करने और लोगों के न्याय, निष्पक्ष सुनवाई व त्वरित सुनवाई के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए सरकार को कानूनी नोटिस भेजा गया है। उच्चतम न्यायालय के दो वकीलों बैरिस्टर मोहम्मद हुमायूं कबीर पल्लव और बैरिस्टर मोहम्मद कौसर (Barrister Mohammad Humayun Kabir Pallav and Barrister Mohammad Kausar) ने रविवार को यह नोटिस भेजा।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार यह नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट और ई-मेल के माध्यम से कानून और न्याय विभाग के सचिव, कैबिनेट सचिव, वित्त विभाग के सचिव, उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और अटॉर्नी जनरल को भेजा गया। संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए नोटिस में कहा गया है कि नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे संविधान का सम्मान करें, जबकि वकील, अदालत के अधिकारियों के रूप में, संवैधानिक उल्लंघनों को रोकने की शपथ लेते हैं।
नोटिस में अनुच्छेद 22 का भी उल्लेख किया गया है, जो न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने का प्रावधान करता है। इसमें तर्क दिया गया है कि पर्याप्त वित्तीय और बुनियादी ढांचे के समर्थन के बिना सार्थक अलगाव सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। नोटिस के अनुसार, 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय बजट में उच्चतम न्यायालय के लिए 291 करोड़ टका आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित बजट में 270 करोड़ टका से अधिक है।
वकीलों ने कहा कि देश के इतिहास के सबसे बड़े, 9,38,000 करोड़ टका के राष्ट्रीय बजट की तुलना में यह आवंटन नगण्य है। नोटिस में कानून मंत्री मो. असदुज्जमां (Law Minister Md. Asaduzzaman) के हालिया बयान का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने न्यायपालिका को “सबसे उपेक्षित क्षेत्र” बताया था। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के लिए कुल आवंटन 2,200 करोड़ टका था, जबकि बांग्लादेश टेलीविजन के लिए 2,500 करोड़ टका और युवा और खेल मंत्रालय के लिए 4,000 करोड़ टका से अधिक का आवंटन था।
नोटिस में तर्क दिया गया है कि यह असमानता न्यायपालिका के प्रति राज्य की उपेक्षा को दर्शाती है, जो 17 करोड़ से अधिक लोगों को न्याय दिलाने के लिए जिम्मेदार है। नोटिस के अनुसार, 2,200 करोड़ टका के आवंटन का एक बड़ा हिस्सा निचली अदालतों के अधिकारियों, प्रशासन, बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं (जैसे चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट की इमारतें बनाना और ई-जुडिशियरी ऑटोमेशन) के वेतन और भत्तों पर खर्च किया जाता है।
इसके बावजूद, वकीलों का कहना है कि न्यायपालिका के काम के बोझ, लंबित मामलों और संवैधानिक महत्व को देखते हुए कुल आवंटन अपर्याप्त है। नोटिस में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में न्यायपालिका का आवंटन राष्ट्रीय बजट का औसतन केवल 0.41 प्रतिशत रहा है और कुछ वर्षों में तो उच्चतम न्यायालय के लिए विकास आवंटन शून्य तक पहुंच गया था।
नोटिस में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया है कि उच्च न्यायालय और निचली अदालतों में अभी 45.1 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसमें कहा गया है कि लंबित मामलों का यह बोझ न केवल एक न्यायिक मुद्दा बन गया है, बल्कि एक सामाजिक संकट भी है, जिससे जनता का भरोसा कम हो रहा है, निवेश हतोत्साहित हो रहा है और सामाजिक असमानता बढ़ रही है।
नोटिस के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 तक अपीलीय डिवीजन में लगभग 31,120 मामले और उच्च न्यायालय डिवीजन में लगभग 5,80,000 मामले लंबित थे। इसमें बताया गया है कि अपीलीय डिवीजन में अभी छह जज हैं, जबकि उच्च न्यायालय डिवीजन में 103 जज हैं, जिनमें 77 स्थायी और 26 अतिरिक्त हैं। वकीलों का दावा है कि हर डिवीजन में प्रति जज मामलों का बोझ 5,000 से ज्यादा है, जो उनके अनुसार त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई की संवैधानिक गारंटी के अनुरूप नहीं है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि न्यायपालिका सुधार आयोग ने निचली अदालतों के जजों की संख्या लगभग 2,000 से बढ़ाकर कम से कम 6,000 करने और अपीलीय डिवीजन में कम से कम सात जज सुनिश्चित करने की सिफारिश की थी। नोटिस के अनुसार, आयोग ने जनवरी 2025 में अपनी सिफारिशें सौंपी थीं, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए कोई विशिष्ट बजट अनुमान जारी नहीं किया गया है।
वकीलों का कहना है कि अपर्याप्त फंडिंग के कारण वकीलों के लिए चैंबर, बैठने की जगह, शौचालय, साफ पानी, डिजिटल और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और लाइब्रेरी सुविधाओं की कमी हो गई है। नोटिस के अनुसार, अभी सिर्फ दो उच्च न्यायालय बेंच ही कमर्शियल मामलों को देख रही हैं, जिसकी वजह से लगभग 2,50,000 करोड़ टका मूल्य के कमर्शियल विवाद साल-दर-साल बिना सुलझे पड़े हैं।
इसमें यह भी बताया गया कि 2009 में अपीलेट डिवीजन में 11 जज थे, लेकिन अभी सिर्फ पांच हैं, जिससे कई बेंच चलाना मुश्किल हो रहा है। नोटिस के अनुसार, अपीलेट डिवीजन में मामलों की संख्या 1972 में 4,056 से बढ़कर अभी लगभग 42,000 हो गई है। 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान उच्च न्यायालय डिवीजन में दायर मामलों में से सिर्फ 35 फीसद और अपीलेट डिवीजन में दायर मामलों में से सिर्फ 18 फीसद मामलों का निपटारा किया गया।
नोटिस में उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन की ताजा मतदाता सूची का हवाला दिया गया, जिसमें 11,097 रजिस्टर्ड वकील हैं। इसमें कहा गया है कि यह संख्या कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम कर रहे सक्रिय वकीलों की संख्या का एक अनुमानित आंकड़ा है। जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए वकीलों ने कहा कि मुकदमा लड़ने वालों को अकसर इंतजार करना पड़ता है।
