
गडकरी बोले- पुराने ढांचे से नहीं चलेगा काम
मुंबई : (Mumbai) देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बढ़ते यातायात दबाव ने अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Transport Minister Nitin Gadkari) को भी चिंता में डाल दिया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे गडकरी खुद करीब एक घंटे तक यातायात जाम में फंसे रहे। कार्यक्रम में देरी से पहुंचने के बाद उन्होंने मुंबई की यातायात व्यवस्था पर खुलकर बात की और कहा कि शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले मौजूदा सड़क ढांचा अब पर्याप्त नहीं रह गया है।
पुराने फ्लाइओवरों पर बढ़ा दबाव
गडकरी ने कहा कि मुंबई में कई फ्लाइओवर उस समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जब शहर में वाहनों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी। अब वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण यही पुराने फ्लाइओवर कई जगह यातायात की रफ्तार रोकने वाले बिंदु बन गए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यातायात ढांचे की नए सिरे से योजना बनानी होगी।
एक ही पिलर पर कई रास्ते
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में जमीन की कमी को देखते हुए बहुस्तरीय परिवहन व्यवस्था पर जोर देना होगा। एक ही पिलर पर अलग-अलग स्तरों पर सड़क मार्ग और उसके ऊपर मेट्रो जैसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे कम जमीन में अधिक यातायात को संभालने के साथ-साथ शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
मलेशिया से ली आधुनिक तकनीक
गडकरी ने बताया कि इस तरह की बहुस्तरीय व्यवस्था के लिए भारत ने मलेशिया से आधुनिक तकनीक हासिल की है। इसका इस्तेमाल पुणे में प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं में किया जा सकता है। इन परियोजनाओं पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि महानगरों में यातायात की समस्या का समाधान केवल नए रास्ते बनाने से नहीं होगा, बल्कि उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना होगा।
वाहन उद्योग में भारत की बड़ी छलांग
गडकरी ने भारत के वाहन उद्योग की बढ़ती ताकत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार बन चुका है। देश में वाहनों की संख्या और वाहन उद्योग का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। वाहन उद्योग का कारोबार करीब 14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि वाहन उद्योग में बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है। यदि सड़क, फ्लाइओवर और मेट्रो व्यवस्था का समन्वित विकास नहीं हुआ तो महानगरों में यातायात का दबाव और बढ़ सकता है।
मुंबई जैसे शहरों को चाहिए दूरगामी योजना
गडकरी की बातों का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरों में भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर अभी से योजना बनानी होगी। उनका कहना था कि बढ़ते वाहनों के बीच पुराने ढांचे पर निर्भर रहना लंबे समय तक संभव नहीं है। बहुस्तरीय सड़क और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के जरिए ही महानगरों को बढ़ते यातायात दबाव से राहत दिलाई जा सकती है।
