
चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) (SIR) को त्रुटिपूर्ण बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके प्रभाव लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
खरगे ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि कांग्रेस शुरू से ही एसआईआर प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताती रही है। अब जब यह प्रक्रिया दिल्ली में चल रही है, तो इसके प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (Deputy Prime Minister L.K. Advani), केंद्रीय विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, राज्यसभा सांसदों तथा अन्य प्रमुख व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत रत्न से सम्मानित एक वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख को भी पहले नोटिस दिया जा चुका है।
खरगे ने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों से संबंधित अपीलों पर बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिली और उन्हें फिर से सूची में शामिल करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि यदि बाद में नाम बहाल किए जा रहे हैं तो शुरुआती स्तर पर नाम हटाने का आधार क्या था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग (Congress President also objected to the Election Commission) की हालिया प्रेस विज्ञप्ति में ‘वीआईपी’ अथवा ‘मार्क्ड इलेक्टर्स’ के उल्लेख पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संविधान सभी मतदाताओं को समान अधिकार देता है और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है। ऐसे में मतदाताओं की किसी विशेष श्रेणी का उल्लेख किए जाने पर आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का अर्थ मतदाता का नाम स्वतः हटाया जाना नहीं है और किसी नाम को हटाने से पहले संबंधित मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
