
नई दिल्ली : (New Delhi) लखीमपुर खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur Kheri violence case) की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से इस मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल जज के खिलाफ वकील प्रशांत भूषण (lawyer Prashant Bhushan) की ओर से लगाए गए आरोपों पर रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले के ट्रायल के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट के जज ने खुद ही ऐसे मामले अपने पास ले लिए जो दूसरी अदालतों को सौंपे गए थे और आरोपितों को राहत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित जज ने नारकोटिक्स एक्ट और एससी-एसटी एक्ट (Narcotics Act and the SC/ST Act) के तहत कई मामले खुद को सौंप लिए और उनमें जमानत दे दी।
इस मामले की सुनवाई कर रहे पिछले ट्रायल जज 15 अप्रैल को रिटायर हो गए और अगले ही दिन मौजूदा जज ने केस संभाल लिया। भूषण ने कहा कि 17 अप्रैल को चश्मदीद गवाह शेर सिंह पेश नहीं हो सके क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में जांच के बाद मेडिकल पर्ची जमा की थी। इसके बावजूद भूषण का आरोप है कि जज ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
आठ मई को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के दौरान केस के गवाहों को धमकाने की सूचना मिलने पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यूपी सरकार ने जो स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है उसमें गवाहों को पेश नहीं करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है।
9 अक्टूबर 2025 को यूपी पुलिस ने बताया था कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपित आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) के खिलाफ गवाह को धमकाने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस ने कहा था कि एक गवाह को धमकाने की शिकायत मिली जिसमें कहा गया कि आशीष मिश्रा और उसके पिता अजय मिश्रा टेनी ने धमकी दी थी। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था।
लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में एसआईटी ने आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपित बनाकर 3 जनवरी 2022 को लखीमपुर की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
