
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) (Delhi government and the Delhi Transport Corporation) से कहा कि वह अपने बेड़े की सभी बसों का दिल्ली की सड़कों पर परिचालन सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को बसों की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) (Public Interest Litigation) को बंद कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में डीटीसी और पब्लिक बस सेवाएं बहाल करने और उन्हें ठीक से चलाने के लिए अधिकारियों से तुरंत निर्देश देने की मांग की गई थी।
यह याचिका वकील अमी सिसोदिया (lawyer Ami Sisodia) की ओर से दायर की गई थी। याचिका में डीटीसी के कर्मचारियों की चल रही हड़ताल से यात्रियों को हो रही परेशानी पर चिंता जताई गई थी। याचिका में कहा गया था कि सार्वजनिक बसों के परिचालन से जुड़े ड्राइवर, कंडक्टर और दूसरे कर्मचारी अपनी सैलरी और दूसरी सुविधाओं को बढ़ाने की मांग को लेकर 15 सितंबर से हड़ताल पर हैं।
याचिका में दिल्ली में डीटीसी का परिचालन तुरंत बहाल करने, उनके रखरखाव और बेरोकटोक परिचालन आगे भी जारी रखने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि महिलाओं के लिए मुफ्त सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण, उन्हें आने-जाने के लिए महंगे दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
याचिका में कहा गया था कि इस हड़ताल का असर दिल्ली-एनसीआर के लाखों निवासियों, छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों, वेतनभोगी कर्मचारियों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्रियों पर पड़ रहा है, जो सस्ते पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि हड़ताल की वजह से यात्रियों का दबाव दिल्ली मेट्रो पर बढ़ गया है।
