
नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल (Congress General Secretary (Organization) KC Venugopal) ने अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janmabhoomi temple in Ayodhya) में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला सामान्य चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा एक बड़ा घोटाला है।
वेणुगोपाल ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पत्र साझा करते हुए कहा कि राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई दान की थी, लेकिन उन पैसों के दुरुपयोग और गबन के आरोप सामने आ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम और आस्था का राजनीतिक तथा आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया। राम मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय (Supreme Court’s verdict) के फैसले के बाद सार्वजनिक भूमि पर केंद्र सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक ट्रस्ट के नेतृत्व में हुआ है, इसलिए मंदिर प्रशासन में होने वाली किसी भी अनियमितता की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
वेणुगोपाल ने दावा किया कि विभिन्न स्तरों से चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कई बार चेतावनियां दी गईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। मंदिर प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार लोगों ने करोड़ों रुपये की कथित लूट के दौरान जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं।
पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिला है कि मंदिर में दान की नकदी और आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। सात से आठ महीने के महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज (Crucial CCTV footage) भी नष्ट किए गए, जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की आशंका पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) (Special Investigation Team) की कार्रवाई अब तक केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि कथित रूप से बड़े और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच नहीं हो रही है। उन्होंने एसआईटी जांच को “आंखों में धूल झोंकने वाला प्रयास” बताते हुए कहा कि इससे वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से मांग की कि मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए तथा इसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय करे। उन्होंने कहा कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल होगा और भगवान राम के नाम पर स्थापित संस्था की पवित्रता सुरक्षित रह सकेगी।
