
श्रीनगर : (Srinagar) श्रीनगर की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने साइबर पुलिस स्टेशन श्रीनगर के स्टेशन हाउस ऑफिसर (Station House Officer) (SHO) को निर्देश दिया है कि वे स्कूल जाने वाले बच्चों के इंटरव्यू वाले वायरल सोशल मीडिया वीडियो को हटाने के लिए तुरंत कदम उठाएं। कमेटी ने नाबालिगों की प्राइवेसी, सुरक्षा और भलाई को लेकर चिंता जताई है। यह निर्देश ‘फेयर वॉयस न्यूज़’ (Fair Voice News) से जुड़े मामले में जारी किया गया है जिसमें स्कूल के बाहर स्कूली बच्चों के इंटरव्यू के वीडियो वायरल हुए थे। कुछ बच्चों को शिक्षा मंत्री सकीना इटू और शिक्षा व्यवस्था (Education Minister Sakina Ittoo and the education system) से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय देते हुए देखा गया था।
श्रीनगर की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. खैर-उल-निसा (Dr. Khair-ul-Nisa) द्वारा जारी आदेश के अनुसार कमेटी ने पाया कि माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की जानकारी और सहमति के बिना और संबंधित स्कूल अधिकारियों की जानकारी या अनुमति के बिना सार्वजनिक मुद्दों पर बच्चों का इंटरव्यू लेना बच्चों की प्राइवेसी, सम्मान, सुरक्षा और उनके सर्वोत्तम हितों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। आदेश में कहा गया है ऐसे वीडियो के लगातार वायरल होने से बच्चों को सार्वजनिक जांच, ऑनलाइन उत्पीड़न, उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल और अन्य तरह के नुकसान का खतरा हो सकता है।
यह जुवेनाइल जस्टिस (Care and Protection of Children) एक्ट, 2015 में बताए गए बच्चों की सुरक्षा के सिद्धांतों और बच्चों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टिंग पर नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स द्वारा जारी गाइडलाइंस के खिलाफ है। जुवेनाइल जस्टिस (Care and Protection of Children) एक्ट, 2015 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सीडब्ल्यूसी ने साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया है कि वे तुरंत उन सोशल मीडिया अकाउंट्स, यूआरएल और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान करें जो इन वीडियो को होस्ट या शेयर कर रहे हैं। कमेटी ने साइबर पुलिस (Cyber Police Station) को यह भी निर्देश दिया है कि वे बच्चों की प्राइवेसी और भलाई की रक्षा के लिए कानून के अनुसार संबंधित इंटरमीडियरीज और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से वीडियो को हटाने या ब्लॉक करने के लिए तेजी से कदम उठाएं। साइबर पुलिस से यह भी कहा गया है कि वे जांच करें कि क्या बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ है और जहां जरूरी हो वहां कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
आदेश में साइबर पुलिस को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, प्राइवेसी, सम्मान और सर्वोत्तम हितों की रक्षा की जाए। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने आदेश मिलने के 48 घंटे के अंदर साइबर पुलिस से ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ (Action Taken Report) (ATR) मांगी है।
