
काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल और भारत (Nepal and India) के बीच संचालित एकमात्र रेल सेवा विस्तार के अंतिम चरण का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। भूमि मुआवजा विवाद सुलझने (resolution of a land compensation dispute) के बाद जयनगर–बर्दिबास रेलमार्ग (Jayanagar–Bardibas railway line) के शेष 18 किलोमीटर हिस्से के निर्माण में तेजी आ गई है। धनुषा और महोत्तरी जिलों में रेल ट्रैक बिछाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
नेपाल रेलवे कंपनी के महाप्रबंधक परिवेश पराजुली (Parivesh Parajuli, General Manager of the Nepal Railway Company) के अनुसार भूमि मुआवजा संबंधी विवाद समाप्त होने के बाद निर्माण कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) ने काम शुरू कर दिया है। लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों के भीतर बर्दिबास तक रेल सेवा शुरू कर दी जाए। निर्माणाधीन 70 किलोमीटर लंबे जयनगर–बर्दिबास रेलमार्ग में से जयनगर–कुर्था खंड पर 19 मार्च, 2022 से नियमित रेल सेवा संचालित हो रही है।
इसी बीच, नेपाल रेलवे कंपनी ने अपनी अतिक्रमित जमीन की पहचान और खोज का अभियान भी शुरू किया है। महाप्रबंधक पराजुली ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने के बाद नक्शों के आधार पर उसकी पहचान की जा रही है।
जयनगर–बर्दिबास रेल परियोजना नेपाल और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण सीमापार ब्रॉडगेज रेल परियोजना (cross-border broad-gauge railway) है, जिसका निर्माण दोनों देशों के द्विपक्षीय सहयोग के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना से नेपाल और भारत के बीच आवागमन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ नेपाल के रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
