
मुंबई : (Mumbai) बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (बेस्ट) (Brihanmumbai Electric Supply and Transport) उपक्रम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में हुई देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आर्थिक तंगी का हवाला देकर कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।
‘आर्थिक संकट देरी का बहाना नहीं बन सकता’
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी (Justice Girish Kulkarni) की एकल पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को समय पर भुगतान न होना बेहद दुखद और चिंताजनक है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की देरी बेस्ट जैसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम की प्रशासनिक असफलता को दर्शाती है और अधिकारियों का रवैया भी निराशाजनक है।
60 से अधिक कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई
यह आदेश 60 से अधिक सेवानिवृत्त बेस्ट कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभों (gratuity, pension, and other due benefits) का भुगतान समय पर नहीं किया गया।
दो माह में ब्याज सहित भुगतान का निर्देश
सुनवाई के दौरान बेस्ट और बीएमसी (BEST and the BMC) की ओर से अदालत को बताया गया कि कुल बकाया राशि का 92.10 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है और शेष 82 करोड़ रुपये का भुगतान भी जल्द कर दिया जाएगा। इस पर हाई कोर्ट ने बेस्ट को निर्देश दिया कि बाकी 82 करोड़ रुपये का भुगतान दो महीने के भीतर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ किया जाए।
