
नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल (Congress General Secretary KC Venugopal) ने अमेरिका की हेल्थकेयर एनालिटिक्स कंपनी कोरोहेल्थ द्वारा केरल के कोच्चि और कोझिकोड स्थित ब्रांच में करीब 900 मेडिकल कर्मचारियों की अचानक छंटनी को मजदूर वर्ग के लिए चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से स्पष्ट है कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को कुचलने वाले काले कानून हैं, जो लाखों लोगों को बर्बादी की ओर धकेल देंगे।
वेणुगोपाल ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि एक ही सुबह पूरी श्रमशक्ति को सेवा समाप्ति और पूर्ण एवं अंतिम निपटान पत्र (full and final settlement letters) थमा दिए गए और गलत तरीके से मुआवजा देकर नौकरी से निकाल दिया गया। इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (Industrial Relations Code) में कर्मचारी की परिभाषा केवल 18,000 रुपये से कम कमाने वालों तक सीमित है, जिससे आईटी कर्मचारियों जैसे अधिकांश लोग इसके दायरे से बाहर हो जाते हैं। इतना ही नहीं, निश्चित अवधि के अनुबंध को कानूनी मान्यता देकर स्थायी कर्मचारियों को अस्थायी और ‘हायर‑ऑर‑फायर’ व्यवस्था में बदलने का रास्ता खोल दिया गया है।
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ये श्रम संहिताएं बड़े कॉरपोरेट घरानों की सुविधा के लिए बनाए हैं और मेहनतकश मजदूरों के अधिकारों को कुचलने के लिए लागू किए हैं। उन्होंने मांग की कि इन कानूनों को संसदीय समीक्षा के लिए वापस भेजा जाए ताकि मजदूरों के पक्ष में संतुलन बहाल किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि विगत शुक्रवार को कोच्चि और कोझिकोड स्थित कोरोहेल्थ (CoroHealth’s offices in Kochi and Kozhikode) के कार्यालयों में काम करने वाले करीब 900 मेडिकल कोडिंग प्रोफेशनल्स को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना और नोटिस पीरियड का पालन किए बिना हटाया गया। विरोध‑प्रदर्शन के बाद स्थानीय विधायक उमा थामस ने मामले में दखल दिया।
