
किसान होने का प्रमाण अनिवार्य
डिजिटल सत्यापन के बाद ही होगी जमीन की रजिस्ट्री
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) ने कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (State Revenue Minister Chandrashekhar Bawankule) ने विधानसभा में घोषणा की कि अब राज्य में कृषि भूमि खरीदने के लिए व्यक्ति का किसान होना अनिवार्य होगा। वैध किसान प्रमाण के बिना किसी भी व्यक्ति को कृषि भूमि की रजिस्ट्री की अनुमति नहीं मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य फर्जी किसानों और भू-माफियाओं पर रोक लगाना है।
धुले भूमि घोटाले के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय धुले जिले में सामने आए कथित भूमि घोटाले के बाद लिया गया है। विधानसभा में धुले के विधायक अनुप अग्रवाल , (Dhule MLA Anup Agrawal) ने वडजाई, पिंपरी और नरवहाल क्षेत्र में गैर-किसानों और बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा नियमों के विरुद्ध कृषि भूमि खरीदने का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में राजस्व मंत्री ने पूरे राज्य में नई और सख्त व्यवस्था लागू करने की घोषणा की।
डिजिटल सत्यापन से होगी किसान की पहचान
राजस्व मंत्री ने बताया कि अब केवल दस्तावेजों के आधार पर किसान होने का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार सेटलमेंट आयुक्त के माध्यम से पूरे महाराष्ट्र की कृषि भूमि का डिजिटल मानचित्र तैयार कर रही है। इस प्रणाली का सीधा उपयोग अब स्टांप एवं पंजीकरण अधिकारियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। जमीन की रजिस्ट्री के समय अधिकारी तुरंत जांच कर सकेंगे कि संबंधित व्यक्ति के नाम पर पहले से कृषि भूमि है या नहीं और वह वास्तव में किसान है या नहीं। संदेह होने पर रजिस्ट्री रोककर विस्तृत जांच की जाएगी।
धुले घोटाले की होगी पुलिस जांच
बावनकुले ने बताया कि धुले भूमि प्रकरण की जांच के लिए विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम (Divisional Commissioner Pravin Gedam) के नेतृत्व में स्वतंत्र जांच दल गठित किया गया है। प्रारंभिक जांच में दो मामलों में खरीदारों के किसान होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। विधानसभा में प्रस्तुत कुछ दस्तावेजों पर लगे तहसीलदार की मुहर भी संदिग्ध पाई गई है। पूरे मामले की जांच धुले पुलिस अधीक्षक करेंगे और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
2010 की अवैध उत्तराधिकार प्रविष्टियां होंगी निरस्त
राजस्व मंत्री ने बताया कि धुले की विवादित भूमि मूल रूप से जयप्रकाश गृहनिर्माण संस्था के 44 सदस्यों के नाम दर्ज थी। वर्ष 2010 में कथित रूप से अधिकारियों की मिलीभगत से मूल मालिकों के उत्तराधिकारियों के नाम अवैध रूप से दर्ज कर भूमि का हस्तांतरण किया गया। सरकार ने अब विशेष अनुमति लेकर इन प्रविष्टियों को निरस्त करने और मूल 44 सदस्यों के अधिकार बहाल करने का निर्णय लिया है।
बाहरी राज्यों के खरीदारों पर भी रहेगी कड़ी निगरानी
सिंधुदुर्ग जिले के दोडामार्ग और मोपा हवाई अड्डे के आसपास बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीदने का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया गया। राजस्व मंत्री ने कहा कि नई डिजिटल प्रणाली और केंद्रीकृत डाटाबेस के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य बोगस किसान बनकर कृषि भूमि खरीदने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाना और वास्तविक किसानों के अधिकारों की रक्षा करना है।
