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Kathmandu : नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति जांच पर लगाई रोक

Kathmandu: Nepal Supreme Court Puts Stay on Asset Inquiry

काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of Nepal) ने पूर्व न्यायाधीशों और संवैधानिक पदाधिकारियों के संपत्ति की जांच पर अंतरिम रोक लगा दिया है। कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीशों और संवैधानिक पदाधिकारियों को उनकी संपत्ति विवरण सौंपने के लिए मजबूर न करने का अंतरिम आदेश संपत्ति जांच आयोग के नाम जारी किया है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश टेकप्रसाद ढुंगाना और श्रीकांत पौडेल (Supreme Court Justices Tek Prasad Dhungana and Shrikant Paudel) की पीठ ने आदेश दिया है कि जिन व्यक्तियों पर संविधान की धारा 239 आकर्षित होती है, उनकी संपत्ति के विवरण को यथास्थिति में रखा जाए। अदालत ने आयोग के गठन के संवैधानिक औचित्य और उसके अधिकार क्षेत्र पर तीन गंभीर सवाल उठाते हुए इस मामले को पूर्ण पीठ (full bench) के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीशों सहित उन सभी संवैधानिक पदाधिकारियों को संपत्ति का विवरण देने के लिए मजबूर न करने का अंतरिम आदेश दिया है, जिन्हें केवल महाभियोग के माध्यम से ही पद से हटाया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि “जब तक पूर्ण पीठ द्वारा अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी को भी संपत्ति का विवरण पेश करने के लिए मजबूर न किया जाए।” इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि उनके द्वारा अब तक पेश किए गए संपत्ति के विवरण की जांच किए बिना उसे यथास्थिति में रखा जाए और किसी के भी खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश न की जाए।

यह आदेश पदाधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के अलावा अन्य लोगों पर संपत्ति की जांच करने से नहीं रोकेगा। आयोग ने जुलाई मध्य तक संपत्ति का विवरण सौंपने की सूचना जारी की है, जिसके बाद संपत्ति की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

उच्चतम न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इनमें गंभीर और जटिल संवैधानिक तथा कानूनी प्रश्न शामिल हैं। अब गठित होने वाली पूर्ण पीठ इन सवालों पर ध्यान केंद्रित करेगी और न्यायिक व्याख्या के साथ-साथ संपत्ति जांच आयोग के गठन के औचित्य और उसके अधिकार क्षेत्र पर फैसला सुनाएगी।

आमतौर पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में पूर्ण पीठ में तीन न्यायाधीश होते हैं। यदि पूर्ण पीठ को भी लगता है कि इसमें और अधिक गंभीर या संवैधानिक व्याख्या की आवश्यकता है, तो इस मामले को पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की वृहद पूर्ण पीठ के समक्ष पेश किया जाएगा।