
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने स्पाइसजेट और अजय सिंह (SpiceJet and Ajay Singh) को निर्देश दिया है कि वो अगले 45 दिनों में केएएल एयरवेज और कलानिधि मारन को 50 करोड़ का भुगतान करें। न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद (justice Subramonium Prasad) की बेंच ने कहा कि इस रकम का भुगतान करने पर ही साफ हो पाएगा कि स्पाइसजेट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के फैसले का अनुपालन करना चाहता है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
उच्चतम न्यायालय ने 19 मई को आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उसके बाद स्पाइसजेट और अजय सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 144 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए समय-सीमा बढ़ाने की मांग की। स्पाइस जेट और अजय सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर 45 दिनों के अंदर 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है, तो आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 34 के (Section 34 of the Arbitration Act) तहत चल रही प्रक्रिया नवंबर तक स्थगित कर दी जाएगी।
आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने जुलाई, 2018 में स्पाइस जेट को आदेश दिया था कि वो मारन को 270 करोड़ रुपये लौटाएं। ट्रिब्यूनल ने स्पाइस जेट को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ ये रकम अदा करने का निर्देश दिया था। मारन और केएएल एयरवेज ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का फैसला उनके पक्ष में आने के बाद उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के आदेश पर मुहर लगा दी थी।
केएएल एयरवेज (KAL Airways) भारत की मीडिया और एयरलाइन निवेश कंपनी है, जिसका स्वामित्व कलानिधि मारन के पास है। कंपनी का वर्तमान में स्पाइसजेट के साथ मध्यस्थता और हर्जाने का कानूनी विवाद है। यह विवाद फरवरी, 2015 में हुए उस शेयर हस्तांतरण समझौते से शुरू हुआ था, जिसके तहत कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज (Kalanithi Maran and KAL Airways) ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 फीसदी हिस्सेदारी अजय सिंह को सौंप दी थी।
