
मुंबई : (Mumbai) बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) (Plaster of Paris) से बनी गणेश प्रतिमाओं के निर्माण और विसर्जन को लेकर बुधवार को राज्य सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Government and the Central Pollution Control Board) (सीपीसीबी) से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। अदालत ने जानना चाहा कि पीओपी की प्रतिमाओं के निर्माण और उनके विसर्जन का कानूनी आधार क्या है तथा क्या सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है। हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और सीपीसीबी इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता (Justice Ajay Gadkari and Justice Kamal Khata) की खंडपीठ रोहित मनोहर जोशी (Rohit Manohar Joshi) की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई (Senior Advocate Mihir Desai) ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश मंडलों द्वारा 15 से 16 फीट ऊंची पीओपी प्रतिमाओं का समुद्र और अन्य प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन किया जाता है। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा (‘Lalbaugcha Raja’) का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के विसर्जन से जल प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है।
