
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने जनकपुरी में तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में आरोपित महिला टीचर को मिली जमानत को निरस्त कर दी है। न्यायाधीश सौरभ बनर्जी (Justice Saurabh Banerjee) की अध्यक्षता वाली बेंच ने महिला टीचर को तीन दिनों में सरेंडर करने का आदेश दिया।
ट्रायल कोर्ट ने महिला टीचर को 20 मई को जमानत दी थी। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को जमानत देकर गलती की है। उन्होंने कहा ये मामला पॉक्सो एक्ट की धारा 6 (Section 6 of the POCSO Act) का है, जिसमें कम से कम बीस साल की जेल का प्रावधान है। दिल्ली पुलिस ने आरोपित महिला टीचर को ट्रायल कोर्ट से मिली जमानत को निरस्त करने की मांग की थी।
इस मामले में पीड़ित बच्ची ने आरोपित की पहचान की है और इस घटना के बारे में बयान दिया है। टीचर पर आरोप है कि उसने प्रशासन से इस घटना की जानकारी छिपाई। इसके पहले उच्च न्यायालय ने 29 जून को आरोपित स्कूल के केयरटेकर को मिली जमानत को भी निरस्त कर दिया था।
ये घटना 30 अप्रैल की है। इस घटना को लेकर बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने (Janakpuri police station) में एक मई को शिकायत दर्ज कराई थी। दुष्कर्म की घटना बच्ची के स्कूल में दाखिले के दूसरे दिन की ही है। 30 अप्रैल को जब बच्ची स्कूल से लौटी, तो उसने दर्द की शिकायत की। बच्ची की मां ने जब उससे पूछा तो उसने बताया कि आरोपित केयरटेकर उसे स्कूल के सुनसान क्षेत्र में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस के मुताबिक बच्ची ने आरोपित की पहचान की, जिसके बाद एक मई को ही गिरफ्तार कर लिया गया।
