
वाडिनार में 1,570 करोड़ की जहाज मरम्मत परियोजना को मंजूरी
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्मत केंद्र बनाने के लिए गुजरात के पोरबंदर में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर तथा कच्छ की खाड़ी के वाडिनार में 1,570 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। दोनों परियोजनाओं को शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (Shipbuilding Development Scheme) (SBDS) के तहत मंजूरी मिली है।
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि ये परियोजनाएं ‘मैरीटाइम अमृतकाल विजन-2047’ (Maritime Amritkaal Vision 2047) और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Union Minister Sarbananda Sonowal) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है और अब अगला चरण देश की जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्मत क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
पोरबंदर जिले के कुचड़ी क्षेत्र में करीब 2,000 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर राष्ट्रीय शिपबिल्डिंग एवं हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-गुजरात (NSHIP-Gujarat) के माध्यम से स्थापित किया जाएगा। यह विशेष प्रयोजन वाहन (special purpose vehicle) (SPV) बंदरगाह मंत्रालय और गुजरात समुद्री बोर्ड की संयुक्त पहल है। परियोजना में आधुनिक शिपयार्ड, सहायक विनिर्माण इकाइयां, साझा अवसंरचना और कौशल विकास केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 12 से 15 लाख ग्रॉस टनेज (gross tonnage) (GT) होगी, जिससे बड़े वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण में भारत की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
दूसरी परियोजना के तहत वाडिनार में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) (CSL) और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (Deendayal Port Authority) (DPA) संयुक्त रूप से देश की सबसे बड़ी जहाज मरम्मत सुविधाओं में से एक विकसित करेंगे। 1,570 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पात्र पूंजीगत अवसंरचना पर 25 प्रतिशत वित्तीय सहायता भी मिलेगी। परियोजना में 650 मीटर लंबी जेटी, दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक, कार्यशालाएं और अन्य समुद्री अवसंरचना विकसित की जाएगी।
मंत्रालय के अनुसार, वाडिनार की प्राकृतिक गहराई, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के निकट स्थिति और मुंद्रा तथा दीनदयाल बंदरगाह जैसे प्रमुख पोर्ट्स की नजदीकी इसे जहाज मरम्मत के लिए आदर्श केंद्र बनाती है। परियोजना पूरी होने के बाद 300 मीटर तक लंबे बड़े वाणिज्यिक जहाजों की मरम्मत देश में ही संभव हो सकेगी, जिससे विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता कम होगी।
सोनोवाल ने कहा कि दोनों परियोजनाएं समुद्री विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगी, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर भारत को वैश्विक समुद्री उद्योग में अग्रणी बनाना है।
