
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 19 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की सेहत पर नजर रखने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि देश के हर इंसान की जिंदगी कीमती है, इसलिए उसे बचाने की पूरी कोशिश की जानी चाहिए। अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि रोजाना सरकारी डॉक्टरों की ओर से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच की जाए।
उच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी 19 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि रोजाना सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की विशेषज्ञों और डॉक्टरों द्वारा जांच की जा रही है। डॉक्टरों की राय के आधार पर उनके जीवन रक्षा के लिए भी जो करना जरूरी होगी, वो सरकार करेगी।
याचिका वकील राकेश कुमार सैनी (lawyer Rakesh Kumar Saini) ने दायर की थी। 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान सैनी ने कहा था कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता विरोध के अपने अधिकार का उपयोग करते हुए पूरे देश के सामने अपनी जान देने को तैयार है। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि वो सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाएं और उन्हें जबरन खाना खिलाएं। याचिका में कहा गया था कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। अनशन के 19वें दिन सोनम वांगचुक का वजन साढ़े आठ किलो घट गया। अगर वो और ज्यादा दिनों तक अनशन करते हैं तो उनकी एक-दो दिनों में मौत हो सकती है। याचिका में कहा गया था कि अगर सोनम वांगचुक की मौत होती है तो ये पूरे देश औऱ दुनिया के लिए शर्म की बात होगी।
सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उसके बाद से लगातार अनशन पर हैं। इस विरोध के जरिये नीट पेपर लीक समेत दूसरे पेपर लीक और अनियमितताओं के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) का इस्तीफा मांगा जा रहा है।
