
डॉक्टरों से हड़ताल पर पुनर्विचार की अपील
कल्याण : (Kalyan) मुंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने डॉक्टरों पर हमले के मामले में कल्याण के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों को मिली जमानत रद्द कर दी है। दंडाधिकारी अदालत के जमानत आदेश पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड (Acting Chief Justice Ravindra Ghuge and Justice Gautam Ankhad) की खंडपीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
घटना की गंभीरता को नहीं दिया गया पर्याप्त महत्व
खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने महापालिका अस्पताल (municipal hospital) में घुसकर तीन डॉक्टरों के साथ गंभीर मारपीट की थी। अदालत ने टिप्पणी की कि निचली अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपी के आपराधिक इतिहास और घटना के व्यापक प्रभाव पर पर्याप्त विचार नहीं किया। साथ ही जमानत देते समय जांच में सहयोग या नियमित रूप से पुलिस थाने में हाजिरी जैसी आवश्यक शर्तें भी नहीं लगाई गई थीं।
19 जुलाई तक आत्मसमर्पण का निर्देश
हाईकोर्ट (High Court) ने रमेश म्हात्रे (Ramesh Mhatre) को 19 जुलाई शाम पांच बजे तक डोंबिवली पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय तक आत्मसमर्पण नहीं किया गया तो पुलिस उनकी संपत्ति कुर्क करने सहित कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।
डॉक्टरों से हड़ताल वापस लेने की अपील
रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को जमानत मिलने के विरोध में महाराष्ट्र के डॉक्टर संगठनों ने 22 जुलाई से राज्यव्यापी कामबंद आंदोलन (statewide work stoppage starting July 22) की घोषणा की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने डॉक्टरों से समाज और मानवता के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल के फैसले पर पुनर्विचार करने और सेवाएं जारी रखने की अपील की।
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता निरंजन मुंदार्गी (Advocate Niranjan Mundargi) ने एमिकस क्यूरी (amicus curiae) के रूप में अदालत की सहायता की, जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे और मुख्य सरकारी वकील शिशिर हिरे ने पक्ष रखा।
