
मीरजापुर : (Mirzapur) बदलते मौसम और बढ़ती बीमारियों के बीच सब्जी उत्पादन को अधिक सुरक्षित, पौष्टिक और लाभकारी बनाने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Vegetable Research) (IIVR), अदलपुरा में जीनोम एडिटिंग आधारित नई परियोजना शुरू की गई है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Researc) (ICAR), नई दिल्ली के वित्त पोषण से संचालित इस परियोजना में टमाटर, मिर्च, खीरा और खरबूजे की नई किस्में विकसित की जाएंगी। वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसी किस्में तैयार करना है जो रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों, बेहतर गुणवत्ता की हों और किसानों को अधिक उत्पादन दें।
परियोजना के तहत टमाटर में गुरचा (leaf curl) और उकठा रोग से बचाव के साथ लाइकोपिन व मिठास बढ़ाने, मिर्च में गुरचा रोग, खीरे में पाउडरी मिल्ड्यू तथा खरबूजे की भंडारण क्षमता बढ़ाने पर शोध किया जा रहा है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार (Institute Director Dr. Rajesh Kumar) ने बताया कि यह तकनीक टिकाऊ कृषि और पोषण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
क्या है जीनोम एडिटिंग, किसानों को कैसे होगा फायदा
जीनोम एडिटिंग तकनीक ट्रांसजेनिक (GM) तकनीक से अलग है। इसमें पौधे के भीतर मौजूद जीन में ही सूक्ष्म बदलाव किए जाते हैं, बाहर से कोई नया जीन नहीं जोड़ा जाता। वर्ष 2022 में भारत सरकार ने एसडीएन-1 और एसडीएन-2 श्रेणी की जीनोम एडिटेड फसलों को ट्रांसजेनिक फसलों जैसी कड़ी नियामक प्रक्रिया से छूट दी है। परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. अच्युत कुमार सिंह (Dr. Achyut Kumar Singh) ने बताया कि नई किस्मों से उत्पादन बढ़ेगा, कीटनाशकों का उपयोग घटेगा और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही संस्थान में जीनोम एडिटिंग अनुसंधान व प्रशिक्षण के लिए उत्कृष्टता केंद्र भी विकसित किया जा रहा है।
